मेरठ
ट्रिपल तलाक पर कानूनी जागरूकता कार्यशाला में 100 से अधिक महिलाओं ने लिया भाग
'जागरूकमहिला.इन' पोर्टल का परिचय, कानूनी अधिकारों व सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेरठ। ट्रिपल तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कानूनी जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 100 से अधिक मुस्लिम महिलाओं ने भाग लिया, जिनमें इंस्टेंट ट्रिपल तलाक से प्रभावित कई महिलाएं भी शामिल रहीं। इस दौरान महिलाओं के लिए तैयार किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म जागरूकमहिला.इन का परिचय कराया गया, जहां उन्हें कानूनी अधिकारों, विभिन्न कानूनों, कानूनी उपायों और सहायता सेवाओं की सरल एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यशाला का आयोजन इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज (आईपीईसी), गाजियाबाद द्वारा सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल वेलफेयर के सहयोग से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा वित्तपोषित शोध परियोजना के अंतर्गत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. महजबीन बानो सहित जिला अल्पसंख्यक कार्यालय के प्रतिनिधि डॉ. गफ्फार अली खान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिनिधि सत्यम, राष्ट्रीय मुस्लिम महिला कल्याण समिति की राजस्थान संयोजक निशात हुसैन, लेडी काजी जहांआरा, मौलाना मोहम्मद सलीम, अधिवक्ता रूबी खान, राजस्थान वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ता सरोज खान की उपस्थिति में हुआ।
डॉ. महजबीन बानो ने कहा कि महिलाओं को न्याय तभी मिल सकता है जब वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। उन्होंने महिलाओं से शिक्षा, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षित और सशक्त महिलाएं ही समाज और देश के विकास में प्रभावी योगदान दे सकती हैं।
राष्ट्रीय मुस्लिम महिला कल्याण समिति की राजस्थान संयोजक निशात हुसैन ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ चले आंदोलन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह फैसला महिलाओं के सम्मान और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और एक-दूसरे का सहयोग करने की अपील की।
अधिवक्ता रूबी खान ने महिलाओं को भारतीय कानूनों के तहत प्राप्त अधिकारों, कानूनी संरक्षण तथा पारिवारिक एवं सामाजिक मामलों में पुलिस एवं संबंधित विभागों से सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी। वहीं जिला अल्पसंख्यक कार्यालय एवं राजस्थान वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों ने छात्रवृत्ति, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता और अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए आवेदन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
परियोजना से जुड़े फील्ड अन्वेषकों ने समुदाय स्तर पर किए गए जागरूकता अभियानों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि महिलाओं तक कानूनी जानकारी पहुंचाने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने ‘जागरूकमहिला.इन’ पोर्टल की सराहना करते हुए इसे महिलाओं के लिए उपयोगी पहल बताया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रयास महिलाओं में कानूनी जागरूकता बढ़ाने, लैंगिक न्याय को मजबूत करने तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



