नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
चौसाना। क्षेत्र के गांव कमालपुर में मारपीट के मामले में दर्ज क्रॉस एफआईआर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित पक्ष के राहुल कुमार ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि पहले उन पर समझौते का दबाव बनाया गया और समझौता न करने पर घटना के करीब 16 दिन बाद उनके खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
राहुल कुमार का कहना है कि 28 जून को हुई घटना के संबंध में 29 जून को थाना झिंझाना में एफआईआर संख्या 327/2026 दर्ज हुई थी। इसके बाद थाना पुलिस लगातार दोनों पक्षों में समझौता कराने का प्रयास करती रही। आरोप है कि उनसे दो लाख रुपये लेकर समझौता करने का प्रस्ताव दिया गया। उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि बिडौली चौकी पर तैनात दो पुलिसकर्मी करनाल स्थित एक अस्पताल पहुंचकर समझौता करने का दबाव बनाते रहे और ऐसा न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
राहुल का कहना है कि समझौते से इन्कार के बाद 13 जुलाई को उनके खिलाफ एफआईआर संख्या 351/2026 दर्ज कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दूसरे पक्ष को भी घटना के दिन चोटें आई थीं तो उसी समय मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया। लगभग 16 दिन बाद क्रॉस एफआईआर दर्ज होने के पीछे की परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने एसपी से एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी, कथित समझौता प्रस्ताव, पुलिसकर्मियों की भूमिका तथा पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
प्रार्थना पत्र में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले समझौते के लिए लगातार दबाव बनाया गया और सफलता नहीं मिलने पर बाद में क्रॉस एफआईआर दर्ज कर दी गई। यदि घटना 28 जून की थी तो दूसरी एफआईआर 13 जुलाई को ही क्यों दर्ज हुई, यह जांच का विषय है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषी मिलने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
