भरत पुर
अग्रवाल समाज की महिलाओं ने मनाई नाग (भैया ) पंचमी, किया पूजन
लहरिया और चुनरी पहन कर किया सोलह श्रंगार

मंगलगीतों के साथ सुनी कथा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भुसावर : भरतपुर जिले के ऐतिहासिक भुसावर कस्बे सहित उपखण्ड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में आज 03 अगस्त सोमवार को अग्रवाल समाज की महिलाओं ने सावन मास की पंचमी तिथी को नाग पंचमी जिसे अग्रवाल समाज में मामा पांचे अथवा भैया पांचे भी कहा जाता है, के पावन पर्व पारम्पारिक उल्लास, बाम्बी पूजन और परिवार की सुख- समृद्धि की कामना के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण से अपने समाज को, अपने कुल पुरुष की प्रेरणा से आज तक निर्वाहन करते हुए मनाया गया। वहीं भुसावर में अग्रवाल समाज की महिलाएं अल सुबह से ही परम्पागत वेशभूषा विशेषकर लहरियां और चुनरी पहन कर सोलह श्रंगार कर समुह में मंगलगीत गाती हुई कस्बे के रामद्वारा, कोठी वाले हनुमान जी मन्दिर, वेर वाले हनुमान जी मन्दिर के पास, बागों और उधानों में जाकर तो कहीं नाग बाम्बी नहीं थी तो पेड़ के पास पूजन किया। कुछ अग्रवाल महिलाओ ने नाग देवता के वास स्थल यानी बाम्बी (बिल), बम्बू और झाड़ियों के पास दीवार पर नाग नागिन की जोडी बनाकर जल, दूध, सिन्दूर और विल्व पत्र अर्पित करते हुए पांच प्रकार के अन्न, दलहन भिगोकर ठंडी रोटी और पापड़ आदि से पूजन किया। वहीं घर से तैयार कर लाए प्रसाद का भोग लगाया। वहीं अग्रवाल समाज की महिला बबीता सिंघल, अर्चना, सरोज और सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि हमारे ईस्ट अग्रसेन महाराज ने नागराज कुमूद कि कन्या माधवी से विवाह किया था। अग्रसेन के पुत्रों का विवाह भी नागवंश की कुमारियो के संग हुआ था। इस प्रकार नाग अग्रवालों के मामा परिवार से हैं। इसी कारण अग्रवालों में नागवंश के प्रति आदर की भावना एवं पूजा की जाती है। अग्रवाल वैश्य नागों को मां पक्ष मानते हैं। इसलिए विवाह के अवसर पर छत्र पर चुंदरी चढ़ाई जाती है। जो विवाह के समय दुल्हे छत्र लेकर चला जाता है। अतः शादी विवाह में थापे तथा बान की रस्म विवाह के समय महिलाएं सर्फ के फन के आकार की चुडी, चांबरी और चुनरी धारण करती है।



