खैरथल

40 वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में रही एक बीघा भूमि को PWD ने कराया मुक्त

1000 पौधों से संवारा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
किशनगढ़बास। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) खंड किशनगढ़बास ने करीब 40 वर्षों से अतिक्रमण की चपेट में रही लगभग एक बीघा सरकारी भूमि को करीब तीन माह के लगातार प्रयासों एवं कानूनी नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त कराया। अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए लगभग 1000 पौधों का रोपण किया गया।
यह पूरी कार्रवाई अधीक्षण अभियंता श्री ओमप्रकाश किराड़ के निर्देशन में की गई। उनके मार्गदर्शन में अधिशासी अभियंता श्री आदेश कुमार यादव एवं सहायक अभियंता श्री विजय पाल यादव द्वारा आवश्यक विभागीय एवं कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रशासन के सहयोग से भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
तीन माह के प्रयासों के बाद मिली सफलता
विभाग द्वारा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए लगभग तीन माह तक लगातार प्रयास किए गए। इस दौरान प्रचलित कानूनी नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करते हुए प्रशासन से समन्वय स्थापित किया गया। अंततः लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में रही भूमि को मुक्त कराने में सफलता मिली।
अतिक्रमण हटाने के बाद विभाग ने इस भूमि को पुनः अतिक्रमण की चपेट में आने से बचाने और इसका जनहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया।
PWD के पूरे स्टाफ ने किया पौधारोपण
अतिक्रमण मुक्त कराई गई लगभग एक बीघा भूमि पर PWD खंड किशनगढ़बास के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा मिलकर करीब 1000 पौधे लगाए गए। विभागीय स्टाफ ने पौधारोपण में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।
अधिकारियों ने बताया कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, ताकि आने वाले वर्षों में यह भूमि एक सुंदर एवं विकसित हरित क्षेत्र के रूप में तैयार हो सके।
सरकारी भूमि संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण
लगभग चार दशक से अतिक्रमित भूमि को कानूनी प्रक्रिया के तहत मुक्त कराकर उसका उपयोग हरियाली विकसित करने के लिए करना, सरकारी संपत्ति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
PWD खंड किशनगढ़बास की यह पहल सरकारी भूमि के संरक्षण, प्रशासनिक समन्वय, कानून की पालना तथा पर्यावरण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता की एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी के रूप में सामने आई है।
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