बालाघाट
ओबीसी जनगणना में अलग विकल्प और कोड आधारित प्रणाली की मांग
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं होने पर 2 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा द्वारा मंगलवार को जनगणना-2027 में ओबीसी के लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराने तथा जातिवार जनसंख्या की वैज्ञानिक, सटीक एवं विश्वसनीय गणना के लिए मानकीकृत कोड आधारित प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। मोर्चा ने कहा कि जातिवार जनसंख्या के वास्तविक आंकड़े सामने लाने के लिए गणना की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और वैज्ञानिक होना आवश्यक है।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत सरकार द्वारा जनगणना-2027 में जातिवार जनसंख्या की गणना कराने का निर्णय समावेशी नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन ओबीसी की गणना के लिए अलग विकल्प नहीं दिए जाने और ओपन कॉलम व्यवस्था अपनाए जाने से आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
ओपन कॉलम व्यवस्था का किया विरोध
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने आरोप लगाया कि जनगणना के पहले चरण में ओबीसी के लिए अलग विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया। वहीं दूसरे चरण की प्रश्नावली में भी ओबीसी के लिए स्पष्ट विकल्प नहीं दिए जाने और जाति आधारित गणना के लिए ओपन कॉलम व्यवस्था रखे जाने पर संगठन ने आपत्ति जताई है।
ज्ञापन में वर्ष 2011 के जातिगत सर्वे का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस समय भी जातियों के लिए ओपन विकल्प की व्यवस्था अपनाई गई थी। संगठन का दावा है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अलग-अलग जाति संबंधी प्रविष्टियां सामने आई थीं, जिसके कारण आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी और अंतिम आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए। मोर्चा ने कहा कि इसी प्रकार की व्यवस्था दोबारा अपनाए जाने से जातिवार जनसंख्या के वास्तविक आंकड़े प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।
एससी-एसटी की तर्ज पर ओबीसी गणना की मांग
मोर्चा ने मांग की है कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की जनगणना के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसी प्रकार ओबीसी की भी अलग से गणना की जाए। संगठन का कहना है कि प्रत्येक जाति की पहचान और गणना के लिए पूर्व निर्धारित एवं मानकीकृत व्यवस्था होने से आंकड़ों में दोहराव, भ्रम और त्रुटियों की संभावना कम होगी।
ज्ञापन में रखीं छह प्रमुख मांगें
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. एससी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी जनगणना में अलग विकल्प दिया जाए और उसी वैज्ञानिक पद्धति से ओबीसी की गणना की जाए।
2. प्रत्येक राज्य के लिए आधिकारिक एवं व्यापक मास्टर जाति निर्देशिका तैयार की जाए।
3. प्रत्येक जाति को एक विशिष्ट कोड प्रदान किया जाए, ताकि आंकड़ों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन किया जा सके।
4. अनियंत्रित ओपन कॉलम व्यवस्था को समाप्त कर मानकीकृत विकल्प आधारित प्रणाली लागू की जाए।
5. असूचीबद्ध एवं स्थानीय जातियों के सत्यापन के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी संस्थागत व्यवस्था बनाई जाए।
6. जाति संबंधी आंकड़ों के संग्रह, सत्यापन और संकलन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित एवं ऑडिट योग्य बनाया जाए।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि उपरोक्त मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है तो 2 सितंबर 2026 से जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
आंदोलन को दो चरणों में आयोजित करने की बात कही गई है। पहले चरण में 25 अगस्त 2026 को देशभर के जिला एवं तहसील मुख्यालयों से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसके बाद दूसरे चरण में 2 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की गई है।




