बालाघाट
देवलगांव में 09 शासकीय बबूल के पेड़ों की कटाई का मामला गरमाया
शिकायतकर्ता ने सरपंच पति पर धमकाने और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का लगाया आरोप, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच एवं सुरक्षा की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : ग्राम पंचायत देवलगांव में कथित रूप से नियम विरुद्ध 09 शासकीय बबूल के पेड़ों की कटाई का मामला अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन क्रमांक 181 पर शिकायत करने वाले ग्राम बिसोनी निवासी पवन कश्यप ने जिला कलेक्टर बालाघाट को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने के साथ-साथ शिकायत के बाद कथित रूप से मिल रही धमकियों और दबाव की भी जांच कर संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
पवन कश्यप ने अपने आवेदन में बताया कि वे ग्राम पंचायत बिसोनी के उपसरपंच हैं तथा पिछले लगभग 10 वर्षों से क्षेत्र में पत्रकारिता का कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार ग्राम पंचायत देवलगांव में नियम विरुद्ध बबूल के 09 शासकीय पेड़ों की कटाई किए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने लगभग एक माह पूर्व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के संबंध में राजस्व विभाग द्वारा जांच किए जाने तथा पंचनामा तैयार किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
शिकायत के बाद दबाव बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद से ग्राम पंचायत देवलगांव के सरपंच पति कमल किशोर ठाकरे द्वारा कथित तौर पर शिकायत वापस लेने अथवा शिकायत को आगे नहीं बढ़ाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है और धमकाया जा रहा है। पवन कश्यप के मुताबिक उन्होंने इस संबंध में 17 अगस्त 2026 को कलेक्टर कार्यालय बालाघाट, जिला पंचायत बालाघाट, जनपद पंचायत लांजी, तहसील कार्यालय लांजी तथा एसडीएम कार्यालय लांजी में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सुरक्षा एवं उचित कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात उन्होंने कही है।
22 अगस्त को दो बार फोन आने का दावा
आवेदन में पवन कश्यप ने बताया कि 22 अगस्त 2026 को कमल किशोर ठाकरे द्वारा उन्हें दो बार फोन किया गया। पूर्व में कथित रूप से मिल रही धमकियों और दबाव के कारण भयवश उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
पत्रकारिता पर सवाल उठाने से मानसिक एवं सामाजिक ठेस
पवन कश्यप ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उनके संबंध में क्षेत्र में “फर्जी पत्रकारिता” करने की बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वे लगभग एक दशक से पत्रकारिता का कार्य कर रहे हैं और समय-समय पर क्षेत्र से जुड़े शासकीय एवं अशासकीय जनहित के मुद्दों को समाचारों के माध्यम से उठाते रहे हैं। ऐसे में उनकी पत्रकारिता की निष्पक्षता एवं प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए जाने से उन्हें सामाजिक एवं मानसिक रूप से ठेस पहुंचने की बात उन्होंने कही है।
05 अगस्त की घटना का भी आवेदन में उल्लेख
शिकायतकर्ता ने 05 अगस्त 2026 की कथित घटना का भी आवेदन में उल्लेख किया है। उनके अनुसार कमल किशोर ठाकरे द्वारा उन्हें ग्राम पंचायत देवलगांव बुलाया गया था, जहां ग्रामीणों के समक्ष कथित रूप से उनका अपमान किया गया तथा उनसे माफी मंगवाई गई। पवन कश्यप का आरोप है कि लगातार सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित करने और दबाव में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेत के बिल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
आवेदन में पवन कश्यप ने ग्राम पंचायत भवन निर्माण के दौरान रेत उपलब्ध कराने के मामले का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उपसरपंच एवं पत्रकारिता के कार्य के अलावा उनका पुश्तैनी व्यवसाय ईंट-भट्टे से संबंधित है और उनके पास ट्रैक्टर भी है। आवश्यकता पड़ने पर वे विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के लिए सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
उनके अनुसार ग्राम पंचायत देवलगांव के पंचायत भवन निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने दो ट्रिप रेत उपलब्ध कराई थी, जिसका भुगतान अभी लंबित है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव श्री लिल्हारे द्वारा उक्त दो ट्रिप रेत का बिल उनके घर से ले जाया गया था। इस घटना से संबंधित घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध होने तथा आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान उसे प्रस्तुत किए जाने की बात भी उन्होंने कही है।
पवन कश्यप ने आशंका जताई है कि उक्त रेत के बिल को लेकर भी उनके विरुद्ध गलत आरोप लगाए जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
शिकायत सही होने पर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि ग्राम पंचायत देवलगांव में कथित रूप से काटे गए 09 शासकीय बबूल के पेड़ों के मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सरपंच, सचिव एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित कानून एवं नियमों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाए।
वहीं पवन कश्यप ने यह भी कहा है कि यदि उनके द्वारा की गई शिकायत जांच में असत्य पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मामले की निष्पक्ष जांच और वास्तविक स्थिति सामने लाना है।
धमकी की शिकायत की जांच और सुरक्षा की मांग
आवेदन में शिकायतकर्ता ने शिकायत वापस लेने के लिए कथित रूप से बनाए जा रहे दबाव एवं धमकी की जांच करने, 05 अगस्त तथा 22 अगस्त 2026 की घटनाओं की जांच कराने और पूर्व में 17 अगस्त को दिए गए आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने स्वयं एवं अपने परिवार को किसी भी संभावित अप्रिय घटना से सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से यह भी कहा है कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो पूर्व में उनके द्वारा दी गई शिकायतों, धमकी एवं दबाव से संबंधित घटनाओं को भी जांच के दौरान संज्ञान में लिया जाए।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद
पवन कश्यप ने कलेक्टर से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन द्वारा 09 शासकीय पेड़ों की कथित कटाई, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए दबाव एवं धमकी के आरोप तथा रेत के लंबित भुगतान से जुड़े मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।
हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोप
शिकायतकर्ता के कथन पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक अथवा कानूनी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




