गाजियाबाद
लोनी भाजपा में अंदरूनी कलह!
रामविहार मंडल अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने दिया इस्तीफा, जिला नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : भारतीय जनता पार्टी के रामविहार मंडल अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन के भीतर चल रहे कथित असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है। 2 सितंबर को दिए गए त्यागपत्र में मिश्रा ने जिला अध्यक्ष चैन पाल समेत जिला नेतृत्व पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक संगठन के लिए निष्ठा और समर्पण से कार्य करने के बावजूद उन्हें सम्मान के स्थान पर दबाव और अपमान का सामना करना पड़ा।
संतोष मिश्रा ने अपने त्यागपत्र में 12 अगस्त को आयोजित मंडल तिरंगा यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य अतिथि को लेकर जिला अध्यक्ष द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया गया था कि वह कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इसी भरोसे पर उन्होंने जिला अध्यक्ष का नाम मुख्य अतिथि के रूप में प्रचारित कर दिया, लेकिन बाद में कथित तौर पर जिला अध्यक्ष अपनी बात से पीछे हट गए। मिश्रा का आरोप है कि इस मामले को लेकर उन्हें प्रदीप गोस्वामी के माध्यम से धमकाया भी गया।
उन्होंने जून माह की मंडल मासिक बैठक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बिजली की समस्या को लेकर कुछ लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। मिश्रा के मुताबिक, उस दौरान जिला अध्यक्ष ने उन लोगों को कथित रूप से धमकाया और मंडल महामंत्री अमरेश चौधरी पर लोगों को बुलाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद उन पर दबाव बनाकर चौधरी को कारण बताओ नोटिस दिलवाया गया। मिश्रा ने बताया कि इस घटनाक्रम से आहत होकर अमरेश चौधरी ने संगठन से त्यागपत्र दे दिया, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी काफी दुखी हुआ
बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं सुनी गई बात
त्यागपत्र में मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्होंने संगठन के हित में लगातार संयम बनाए रखा और जिला नेतृत्व के समक्ष अपनी समस्याएं रखने का लगातार प्रयास किया, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में प्रदीप गोस्वामी का ही पक्ष लिया जाता रहा, जिससे उनके भीतर निराशा और असंतोष बढ़ता गया।
मिश्रा ने 1 सितंबर को जिला कार्यशाला के बाद हुई कथित घटना को अपने इस्तीफे का तत्काल कारण बताया। उनका कहना है कि मंडल अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता, अश्वनी, जिला महामंत्री देवेंद्र और पवन सोम की मौजूदगी में जिला अध्यक्ष चैन पाल द्वारा उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। मिश्रा ने इसे अपने लिए बेहद पीड़ादायक और असहनीय बताते हुए कहा कि वर्षों तक संगठन के लिए काम करने के बाद उन्होंने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी।
‘धमकाने वाला रवैया संगठन के लिए बेहद चिंताजनक’
संतोष मिश्रा ने जिला अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनका कार्य कराने का तरीका मिलनसार होने के बजाय कथित रूप से दबाव और धमकी भरा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवहार को लेकर जिला पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्षों में भी चिंता है।
त्यागपत्र में मिश्रा ने कहा कि उन्होंने हमेशा संगठन को सर्वोपरि रखा और कभी पद या व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम नहीं किया। उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों, अभियानों और संगठनात्मक गतिविधियों को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाने का दावा किया।
‘क्या ब्राह्मण और प्रवासी होना ही मेरा गुनाह है?’
अपने त्यागपत्र में संतोष मिश्रा ने भावुक अंदाज में सवाल उठाते हुए लिखा कि कभी-कभी उनके मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या “ब्राह्मण होना और प्रवासी होना ही मेरा गुनाह है?” उन्होंने कहा कि यदि वर्षों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण के बावजूद सम्मान और विश्वास नहीं मिल सकता तो मंडल अध्यक्ष पद पर बने रहना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पद छोड़ने के बावजूद पार्टी के प्रति उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं है। उन्होंने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए रामविहार मंडल अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया है।
संतोष मिश्रा के इस्तीफे के बाद भाजपा के स्थानीय संगठन में उठे आरोपों को लेकर राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा तेज हो गई है