गाजियाबाद
धर्म की आड़ में कानून तोड़ने वालों पर हो कठोर व निष्पक्ष कार्रवाई: सुरेंद्र कुमार
मुख्यमंत्री से धार्मिक आयोजनों में हिंसा, नशाखोरी, उपद्रव और अवैध वसूली पर करने वाले लोगों पर रोक लगाने की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर धार्मिक आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के साथ संविधान एवं कानून की सर्वोच्चता सुनिश्चित किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धर्म मानव जीवन में नैतिकता, संयम, करुणा, सत्य, न्याय और सदाचार का मार्गदर्शन करता है, इसलिए धार्मिक आयोजनों का स्वरूप शांतिपूर्ण और अनुशासित होना चाहिए।
मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान, प्रतीक अथवा आस्था की आड़ में दूसरे नागरिक के मौलिक एवं मानवाधिकारों का हनन नहीं कर सकता। धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, लेकिन यह लोक-व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन है।
अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की कि धार्मिक यात्राओं और आयोजनों के दौरान हिंसा, मारपीट, धमकी, तोड़फोड़, नशीले पदार्थों के सेवन या वितरण, अवैध वसूली, सार्वजनिक उपद्रव तथा महिलाओं और अन्य नागरिकों से दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी धार्मिक प्रतीक, यात्रा या आयोजन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव, भय अथवा आपराधिक गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।
पत्र में धार्मिक आयोजनों के दौरान विद्यार्थियों की शिक्षा और परीक्षाओं को अनावश्यक रूप से प्रभावित न होने देने, अस्पतालों, एंबुलेंस, अग्निशमन वाहनों और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग खुला रखने तथा कर्मचारियों, श्रमिकों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
उन्होंने यातायात डायवर्जन और वैकल्पिक मार्गों की समुचित व्यवस्था के साथ महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस एवं यातायात व्यवस्था किए जाने की मांग भी रखी। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और विधि सम्मत होने पर क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की मांग की गई है।
सुरेंद्र कुमार ने जाति, धर्म या अन्य पहचान के आधार पर भेदभाव, अपमान, बहिष्कार अथवा हिंसा की शिकायतों पर तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संविधान की प्रस्तावना, अनुच्छेद 14, 15, 19, 21, 25 से 28, 38, 39 और 51(क) का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि धर्म समाज को जोड़ने, मानवता की रक्षा करने और बंधुत्व स्थापित करने का माध्यम बने, न कि हिंसा, भय, अपराध, राजनीतिक वर्चस्व या सामाजिक विभाजन का साधन। पत्र में दोषी व्यक्ति के जाति, धर्म, राजनीतिक संबंध अथवा सामाजिक प्रभाव की परवाह किए बिना समान कानून और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह एवं न्याय विभाग, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी गाजियाबाद और पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को भी भेजी गई है