लाखों की स्ट्रीट लाइटें, फिर भी अंधेरे में भागूवाला
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बिजनौर : भागूवाला ग्राम पंचायत में ग्रामीणों की सुविधा और सुरक्षा के लिए लगाई गई स्ट्रीट लाइटें इन दिनों शोपीस बनी हुई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है। कि गांव में विभिन्न स्थानों पर लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हैं। दिन में खंभों पर लगी लाइटें व्यवस्था की मौजूदगी जरूर दिखाती हैं, लेकिन शाम ढलते ही गांव के कई रास्ते अंधेरे में डूब जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है। कि सरकारी धन खर्च करने के बावजूद यदि स्ट्रीट लाइटें रोशनी नहीं दे रहीं तो योजना का लाभ लोगों तक कैसे पहुंचेगा। उन्होंने लाइटों के रखरखाव और मरम्मत व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जिसमें
ग्रामीणों के अनुसार गांव की कई गलियों, संपर्क मार्गों और सार्वजनिक रास्तों पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। रात में आवागमन करने वाले लोगों को रास्ता देखने में परेशानी होती है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ जरूरी काम से बाहर निकलने वाले ग्रामीणों को विशेष दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। बारिश के बाद रास्तों पर पानी और कीचड़ जमा होने से अंधेरे में आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। लेकिन
गुलदार की दहशत के बीच बढ़ी ग्रामीणों की चिंता –
भागूवाला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार की गतिविधियों को लेकर लोगों में पहले से ही भय का माहौल है। जंगल और खेतों से सटे इलाकों में रात के समय ग्रामीण अतिरिक्त सावधानी बरत ते हैं। ऐसे में गांव की स्ट्रीट लाइटें बंद होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है।कि गुलदार की दहशत के बीच गांव के रास्तों पर पर्याप्त रोशनी होना बेहद जरूरी है। अंधेरे के कारण रात में लोगों को आवागमन के दौरान असुरक्षा महसूस होती है।
ग्रामीणों का आरोप है। कि लाइटें खराब होने के बाद समय से उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। कई स्थानों पर लंबे समय से लाइटें बंद होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है। कि संबंधित अधिकारी गांव में लगी स्ट्रीट लाइटों का भौतिक सत्यापन कराएं और यह जांच करें कि कितनी लाइटें चालू हैं और कितनी खराब पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है। कि उन्हें केवल खंभों पर लगी लाइटें नहीं, बल्कि रात में वास्तविक रोशनी चाहिए।
भागूवाला में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को लेकर ग्रामीणों का सीधा सवाल है।कि जब इन लाइटों पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। तो रात में गांव को रोशनी क्यों नहीं मिल रही। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जल्द सभी खराब लाइटों को दुरुस्त कराने और जरूरत वाले स्थानों पर अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बरसात के मौसम और गुलदार की दहशत के बीच लोगों को अंधेरे में आवागमन करने के लिए मजबूर न होना पड़े।

