फाउंडेशन के संचालन पर सवाल, आखिरकार जिम्मेदारी किसकी?
मीरपुर हिंदू गौशाला का संचालन श्री ओम फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। वहीं, गौवंश की देखरेख और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए खंड विकास अधिकारी सहित संबंधित नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बताई गई है। इसके बावजूद यदि गौशाला में पशुओं को पर्याप्त भोजन और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में कमियां सामने आती हैं, तो संचालन संस्था के साथ निगरानी तंत्र की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सवाल यह है कि संस्था को गौशाला संचालन की जिम्मेदारी सौंपने के बाद क्या नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? पशुओं के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले भूसे, हरे चारे और चोकर का रिकॉर्ड कौन जांचता है? पेयजल, सफाई और बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्था की समीक्षा कितनी नियमितता से होती है? यदि जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में ऐसी कमियां बनी हुई हैं, तो जवाबदेही केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित क्यों रहे?
मृत गाय का शव पड़ा मिलना, व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल
निरीक्षण के दौरान मृत गाय का शव पड़ा मिलना और उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जाना प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू है। मृत गौवंश के शव का समय पर नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है। इसमें लापरवाही से गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि गाय की मृत्यु कब हुई, जिम्मेदार कर्मचारियों को इसकी जानकारी कब मिली और शव का निस्तारण समय पर क्यों नहीं किया गया। इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर सामने आना चाहिए। मृत पशु के प्रति संवेदनहीनता के आरोपों को भी गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
2 सितंबर की घटना के बाद भी सबक नहीं?
बताया गया है कि 2 सितंबर को भी इसी गौशाला में मृत गौवंश को अन्य पशुओं द्वारा खाते हुए देखे जाने का मामला सामने आया था। यदि उस समय भी ऐसी गंभीर स्थिति सामने आई थी, तो उसके बाद सुधार के लिए क्या कार्रवाई की गई? क्या किसी अधिकारी ने निरीक्षण किया, क्या संचालन संस्था को नोटिस दिया गया और क्या व्यवस्थाओं में सुधार की पुष्टि की गई?
ताजा निरीक्षण में फिर कमियां सामने आने के आरोप इस बात की जांच की मांग करते हैं कि पिछली घटना के बाद जिम्मेदार विभाग ने वास्तव में क्या कदम उठाए। यदि शिकायतों और घटनाओं के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो यह नियमित निगरानी की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल है।
सरकार की प्राथमिकता वाली योजना जमीनी स्तर पर सवालों के घेरे में
गौवंश संरक्षण सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य केवल गौशालाएं संचालित करना या जिम्मेदार संस्थाओं को काम सौंपना नहीं, बल्कि पशुओं को पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, उपचार और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। लेकिन मीरपुर हिंदू गौशाला से सामने आई शिकायतें और निरीक्षण में बताई गई कमियां योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती हैं।
जब गौशाला में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता ही सवालों के घेरे में हो, तो योजना की सफलता का आकलन केवल कागजी रिपोर्टों से नहीं किया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर व्यवस्थाओं की जांच करें और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें।
अधिकारियों की चुप्पी और जवाबदेही का इंतजार
इस प्रकरण में सबसे अहम सवाल संबंधित अधिकारियों और संचालन संस्था की जवाबदेही का है। निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद अब तक क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए, मृत गाय के शव के निस्तारण में देरी की क्या वजह रही और भोजन-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कौन जिम्मेदार है इन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब जरूरी है।
यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, गौशाला में प्रतिदिन उपलब्ध कराए जाने वाले चारे, पानी, सफाई, पशुओं की संख्या, उपचार और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड की नियमित जांच भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
मीरपुर हिंदू गौशाला का मामला केवल एक निरीक्षण में मिली कमियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह गौवंश संरक्षण योजना के क्रियान्वयन, संचालन संस्था की जिम्मेदारी और सरकारी निगरानी व्यवस्था की परीक्षा है। संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि पशुओं की देखभाल में कथित लापरवाही के आरोपों की जांच कौन करेगा, जांच कब तक पूरी होगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि गौवंश संरक्षण के नाम पर जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था और निगरानी के लिए नियुक्त अधिकारी अपनी जवाबदेही कब निभाएंगे? सरकार की प्राथमिकता वाली योजना का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब गौशालाओं में पशुओं को सम्मानजनक देखभाल मिले और लापरवाही के मामलों में जवाबदेही केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई के रूप में दिखाई दे।