जनसंख्या वृद्धि के साथ प्रदेश में अब सार्वजनिक परिवहन की मांग उठने लगी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
रायपुर/छत्तीसगढ़ :– जनसंख्या वृद्धि के साथ प्रदेश में अब सार्वजनिक परिवहन (छत्तीसगढ़राज्य परिवहन निगम) की मांग उठने लगी है।
करीब 25 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ में भी मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद निजी बस संचालकों ने ( पर्यटन बसों को )योजनाबद्ध तरीके से शासन के समक्ष परिवहन निगम को घाटे में बताते हुए निगम की बस सेवा बंद करवा दी।
गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासनकाल में राज्य परिवहन निगम को घाटे में बताते हुए बंद कर दिया गया था। तब से छत्तीसगढ़ में निजी बसों का संचालन हो रहा है। उस समय प्रदेश की जनसंख्या करीब 2 करोड़ थी, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग साढ़े 3 करोड़ हो गई है।
निजी बस संचालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया वसूला जा रहा है। रायपुर से धमतरी की लगभग 80 किलोमीटर की दूरी के लिए 200 रुपये तक किराया लिया जा रहा है, जिससे आम जनता को आर्थिक भार एवं असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
वृद्धजन, दिव्यांग एवं आदिवासी, मन्यता प्राप्त पत्रकारों,यात्रियों को मिलने वाली किराया रियायत तथा यात्रा पास जैसी सुविधाएं भी प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
छत्तीसगढ़ शासन सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहा है? कहीं निजी बस ऑपरेटरों का दबाव तो इसके पीछे कारण नहीं है?
बताया जाता है कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लिए 240 बसें स्वीकृत हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इनका संचालन अभी तक लंबित है। वहीं पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में 21 वर्ष बाद पुनः सार्वजनिक बस सेवा प्रारंभ की गई है। योजना के अंतर्गत वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
जब अन्य राज्यों में आम जनता को सस्ती, सुरक्षित एवं सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है, तो छत्तीसगढ़ में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती? सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू होने से आम जनता पर किराये का आर्थिक भार कम होगा तथा यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।



