गंगनहर की जर्जर पटरी बनी कांवड़ियों के लिए खतरा, सावन से पहले प्रशासन पर उठे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। सावन के आगमन से पहले कांवड़ यात्रा की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन मेरठ के मवाना क्षेत्र में श्रद्धालुओं की राह अब जोखिम भरी नजर आ रही है। अनूपशहर गंगनहर की पटरी कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे हरिद्वार से लौटने वाले हजारों कांवड़ियों की सुरक्षित यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हर वर्ष लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लाकर नंगे पांव अपने गंतव्यों तक पहुंचते हैं। इस वर्ष 23 जुलाई को शिवरात्रि पड़ने के कारण यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या और रफ्तार दोनों बढ़ने की संभावना है।
मवाना तहसील क्षेत्र के झुनझुनी गांव से किठौर कस्बे तक लगभग 22 किलोमीटर लंबी गंगनहर की पटरी जगह-जगह से टूटी हुई है। जौली गांव से शुरू होने वाले इस मार्ग से बुलंदशहर, हापुड़, अलीगढ़ और मथुरा जैसे जिलों के कांवड़िए गुजरते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कहीं गहरे गड्ढे हैं, कहीं डामर उखड़ा हुआ है, तो कहीं बजरी फैली हुई है, जिससे नंगे पांव चलना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक बन सकता है। झुनझुनी, अस्सा, करीमपुर, कूड़ी कमालपुर, मीवा, सीना और मवाना के ग्रामीणों ने इस मार्ग की मरम्मत की मांग की है। उनका कहना है कि यात्रा से पहले सुधार कार्य न होने पर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता नरेंद्र सिंह ने बताया कि झुनझुनी से आगे तक की पटरी पर जल्द पेचवर्क शुरू कराया जाएगा, जिसके लिए लगभग 12 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन समय रहते इस आस्था के मार्ग को सुगम और सुरक्षित बना पाता है या नहीं। फिलहाल श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


