अलवर
देश में अघोषित आपातकाल लगाने वाले आज 50 साल पुराने आपात काल पर चर्चा कर रहे हैंः जूली
55 साल तक जिन्होंने अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया वे आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
अलवर, जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर केन्द्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों में किये जा रहे कार्यक्रमों पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी के पास कोई मुद्दे नहीं हैं। चाहे कालेधन को वापस लेने की बात हो या 15 लाख खातों में डालने की या फिर महंगाई कम या डॉलर का मूल्य बराबर करने की बात हो या फिर गंगा मैया को साफ करने की बात हो। जो-जो बातें इन्होंने कहीं, वे जुमले ही साबित हुए और अब ये नया जुमला लेकर आये हैं, कि आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर 25 जून को ‘काला दिवस’ के रूप में मनायेंगे। उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की संविधान बचाओ यात्रा और रैलियों से घबराकर आज आपातकाल के 50 सालों की बात कर रही है।
जूली ने कहा कि बडे दुर्भाग्य की बात है कि जिनका आजादी की लडाई और संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा और जो समय-समय पर संविधान को बदलने की बात करते रहे हैं, वे लोग आज संविधान के बचाव की बात कर रहे है, बार-बार आपातकाल की बात दोहरा रहे हैं।
जूली ने कहा कि रामलीला मैदान में संविधान की प्रतियां तथा संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर और पं0 जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर जलाने वाले लोगों का संविधान के प्रति अचानक उमडा प्रेम ढकोसला है।
जूली ने कहा कि 1975 में देश में लगाया गये आपातकाल संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था और तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत लगाया गया था। आज 25 जून को काले अध्याय के तौर पर मनाने वाले यह जान लें कि कांग्रेस की नीयत तब भी साफ थी और आज भी उसकी नीति और नीयत में कोई खोट नहीं है। यही कारण था कि 25 जून, 1975 में देश में लगाये गये आपातकाल के पश्चात् जनता ने कांग्रेस सरकार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की नीतियों को भारी जनसमर्थन मिला और देश में कांग्रेस की सरकार बनी।
जूली ने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है पिछले 11 सालों से देश अघोषित आपातकाल को झेल रहा है। संवैधानिक संस्थानों को राजनीतिक दवाब में काम करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। ईडी, इनकम टैक्स जैसी संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है। सत्ता की ताकत के बल विपक्ष और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। देश में आपसी भाईचारे और साम्प्रदायिक सौहार्द के वातावरण को बिगाडा जा रहा है। परस्पर भय और नफरत का माहौल बनाकर राजनीतिक हित साधे जा रहे हैं। आज देश में ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई है, कि सरकार की गलत नीतियों और प्रधानमंत्री का विरोध करने वाले को देशद्रोही समझा जा रहा है। जिनका आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा, जिन्होंने 55 साल तक अपने पार्टी मुख्यालय पर तिरंगा तक नहीं फहराया, वे आज हमें देशभक्ति का पाठ पढा रहे हैं, गली-गली में तिरंगा यात्राएं निकाल रहे हैं। जूली ने केन्द्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारों द्वारा आपातकाल के 50 वर्ष पर काला दिवस मनाने जैसे बयान देने और कार्यक्रम आयोजित किये जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश राष्ट्रनिर्माण में तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी जी के योगदान को कभी नहीं भुला सकता। उनकी दृढ इच्छाशक्ति और कुशल कूटनीतिक नेतृत्व में भारत ने पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया, जो कि भारत की वैज्ञानिक और रणनीतिक शक्ति का प्रतीक बना। इसी प्रकार पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भारत की निर्णायक भूमिका रही, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। यह इन्दिरा गांधी की सबसे बडी अन्तर्राष्ट्रीय उपलब्धि थी, जबकि हाल ही में भारत और पाकिस्तान के युद्ध के निर्णायक दौर में पहुंचने से पूर्व ही देश के कमजोर प्रधानमंत्री द्वारा लिये गये निर्णय सीमा पर अपने प्राणों की आहूति देने को तैयार सैनिक तक हतप्रभ हैं।
जूली ने कहा कि यह संवेदनशील प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की सोच थी कि 1971 के आम चुनाव में ‘‘गरीबी हटाओ’’ का नारा दिया, जिससे गरीबों के बीच उन्हें बडी लोकप्रियता हासिल हुई और उन्होंने कई जन कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत की। उनके द्वारा राज्यों का राष्ट्रीयकरण, प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिससे आर्थिक समावेशन बढा, इसके साथ ही कोयला खनन को भी सरकारी नियंत्रण में लिया गया। जूली ने कहा कि देश में हरित क्रांति को प्रोत्साहन देकर भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में इन्दिरा गांधी ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने गुटनिपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका को मजबूती दी और सोवियत संघ के साथ मैत्री संधि कर भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया जिसका फायदा आज भी देश को मिल रहा है। उन्होंने भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त किया और स्वदेशी रक्षा निर्माण पर जोर दिया। उनके कार्यकाल के दौरान बनाई गई नीतियों पर चलकर ही देश के वैज्ञानिक आज नये सोपान स्थापित कर रहे हैं।
जूली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का सोच और चिंतन सदैव गरीब, पिछडे, शोषित, वंचित, मजदूर, किसान और युवाओं के सशक्तिरण के लिये रहा है। इसी सोच के साथ इन्दिरा जी ने गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, अनुशासन और रोजगार से सम्बन्धित 20 सूत्रीय कार्यक्रम की शुरूआत की। जूली ने कहा कि अनुशासन और आपातकाल हालांकि विवादास्पद रहा, लेकिन तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार देश में आपातकाल लगाया गया। आपातकाल के दौरान प्रशासन में अनुशासन, जनसंख्या नियंत्रण और बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए।
जूली ने कहा कि इन्दिरा गांधी की दूरदृष्टि, पक्का इरादा, अनुशासन, कुशल नेतृत्व, राजनीतिक कौशल के कारण ही उन्हें ‘आयरन लेडी’ कहा जाता था। उन्होंने अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रूख अपनाया। वे पृथकतावादी ताकतों के आगे कभी झुकी नहीं जिससे राष्ट्रीय अखंडता को बनाये में मदद मिली। वे देश की एकता और अखण्डता के लिये देश पर कुर्बान हो गईं। आज देश उन्हें आदर और सम्मान से याद करता है।



