ललितपुर

ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो भाइयों की हुयी थी मौत, पिता घायल

एक ही चिता पर जले दो सगे भाई, माहौल गमगीन घरों में नहीं जले चूल्हे, बोले ग्रामीण बड़ी हृदय विदारक घटना

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर पाली। किसान परिवार में एक साथ दो सगे भाइयों की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद जब उनके शव गांव आए तो दोनों मृतक भक्ष्यों की मां का कलेजा फटा सा जा रहा थ… उनकी पत्नियां कभी चीखती, चिल्लाती तो तो कभी बेसुध होकर उनके सीने से लग जाती, बदहवास बहिनें अपने को रोक नहीं पा रही थी लेकिन कभी मां को समझरातों तो कभी अपनी भाभीयों की समझाते खुद आंसुओं के सैलाब में डूब जाती है। मृतक दोनों भाई के बाड़ा भाई उनके बच्चों को सीने से लगाए बड़े दर्द में बना था। जैसे ही दोनों मृतक भाइयों के शव पर से बाहर निकले और एक ही चित्र पर दोनों भाइयों के शव एक साथ जले उनके मासूम बच्चों ने उनको मुखाग्नि दी वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखे नम हो गयी।
विगत शनिवार को धाना पाली अंतर्गत ग्राम निवाहो में किसान परिवार के एक पिता बृजलाल व उसके दो पुत्र सोन सिंह उम्र 35 वर्ष, रंजीत सिंह उम्र 31 वर्ष ट्रैक्टर ट्रॉली से मध्यप्रदेश के अशोकनगर सोयाबीन के बीज खरीदने गए थे लेकिन लौटते थाना चंदेरी के पास रात्रि दस बजे की करीब उनकी ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर प्रानपूरा की खाई में जा गिरी, जिससे जहां दो सगे भाइयों की मौत हो गयी तो उनके घायल पिता का उपचार झांसी में चल रहा है। जिस रात यह घटना हुई उस दिन गांव के कुछ ग्रामीण भी देर शाम तक उनके घर आ रहे थे कि और मृतकों की मां और बड़े भाई लक्ष्मण सिंह से कह गए थे कि भक्ष्या अगर ज्यादा बीज लाए थे तो कुछ सोयाबीन का बीज हमें भी दे देना। तो वहीं देर शाम से मृतकों की मां अपने पति के साथ दोनों बच्चों के आने के इन्तजार में दरवाजे पर बैठी थी तो उनकी पलियां घर में रोटी बनाकर अपने पति की राह देख रही कि आने पर खाना साथ खाएंगे, लेकिन यहां कुदरत को कुछ और ही मंजूर था कि मृतकों की मां उनकी पत्नियों और बच्चों का इतंजार अब खाम होने वाला हसे नहीं था। ट्रैक्टर दुर्घटना की जानकारी मिली तो बड़ा भाई मोहल्ले के लोगों के साथ अस्पताल पहुंचा तो वहीं ग्रामीण घर की महिलाओं को दिलासा दिला रहे थे कि कुछ नहीं हुआ है सब ठीक हो जाएगा। रविवार को जहां किसान बृजलाल का अस्पताल में उपचार चल रहा था तो वहीं उसके दोनों पुत्रों का शव लिपटकर घर आया। रविवार को लकड़ी की चित्र तो एक जली लेकिन उस पर शव दो सगे भाइयों के थे। हृदय विदारक घटना के बाद गांव के घरों में भी चूल्हा नहीं जला। क्या महिलाएं क्या पुरुष हर कोई दोनों भाइयों की मौत से गमगीन बने थे। मृतक के बड़े भाई लक्ष्मण सिंह ने बताया कि उसके दोनों भाइयों पर किसान कार्ड का कर्जा है, बावजूद इसके परिवार में सब खुशहाल थे लेकिन अब दर्द इतना बड़ा मिला कि कभी इसे भुता नहीं सकते। जहां मुक्तक सोनसिंह का एक दस वर्षीय पुत्र है तो वहीं रंजीत का एक सात वर्षीय पुत्री व एक पांच वर्षीय पुत्र है।
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