शामली

पठानपुरा में सुलोचना सती की लीला बनी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
चौसाना। के गांव पठानपुरा में शनिवार की रात सुलोचना सती की लीला का भव्य मंचन किया गया, जिसने आस्था और परंपरा के साथ-साथ हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनोखी मिसाल भी पेश की। सहारनपुर जिले के इस्माइलपुर माजरा इस्लामनगर निवासी मुस्लिम युवक ताहसीन हसन ने लगातार सातवें वर्ष सुलोचना सती की भूमिका निभाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला के भावुक प्रसंग में दिखाया गया कि घनघोर युद्ध के बाद लक्ष्मण मेघनाद का वध कर देते हैं। इसके बाद सुलोचना अपने पति का शीश मांगकर सतीत्व का प्रमाण देती है और चिता में सती हो जाती है। यह दृश्य देख उपस्थित दर्शकों की आंखें नम हो गईं और पूरे मैदान में सन्नाटा छा गया।
ताहसीन हसन की प्रभावशाली और जीवंत प्रस्तुति को सभी ने सराहा और उनकी भूमिका को आपसी सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। मंचन में अन्य भूमिकाएं मनीष कुमार (मंदोदरी), सन्नी सैनी (रावण), सतपाल सैनी (मेघनाद), प्रशांत सैनी (राम), अनिकेत सैनी (लक्ष्मण), बादल प्रजापत (सीता), विशाल सैनी (सुग्रीव) और मोनू प्रजापत (हनुमान) ने निभाईं। समस्त कमेटी की मौजूदगी में हुए इस मंचन में भारी संख्या में जुटे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का जीवंत उदाहरण करार दिया।
कौन हैं ताहसीन हसन?
सहारनपुर जिले के इस्माइलपुर माजरा इस्लामनगर निवासी ताहसीन हसन पेशे से एक साधारण युवक हैं, लेकिन धार्मिक आयोजनों में विशेष रुचि रखते हैं। वे पिछले सात वर्षों से लगातार पठानपुरा में सुलोचना सती की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी भावुक प्रस्तुति और मंच पर जीवंत अभिनय हर बार दर्शकों का दिल जीत लेता है। ताहसीन कहते हैं कि उनका मकसद सिर्फ एक ही है। धर्म कोई भी हो, भाईचारा सबसे ऊपर है। यही कारण है कि लोग उन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल मानते हैं।
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