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रेयर अर्थ पर मोदी सरकार ने किया ऐसा ऐलान, 7280 करोड़ का शुरू होगा प्रोजेक्ट

नई दिल्ली : साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह भारत सरकार द्वारा रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक आरईपीएम बाजार में भारत को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की अपनी तरह की पहली पहल है।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेटी कमेटी की मीटिंग हुई। बैठक के दौरान रेयर अर्थ परमानेंट मैगनेट मैन्युफैक्चरिंग, पुणे मेट्रो का विस्तार, देवभूमि द्वारका(ओखा)- कनालुस रेलवे लाइन को डबल करने के साथ ही बदलपुरा-करजत की तीसरी और चौथी रेलवे लाइन से जुड़े बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ को मंजूरी दी गई। साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह भारत सरकार द्वारा रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक आरईपीएम बाजार में भारत को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की अपनी तरह की पहली पहल है।
दुर्लभ मृदा चुम्बकों का उपयोग प्रमुख उद्योगों में किया जाता है, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण और रक्षा शामिल हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया, यह योजना दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बकों के निर्माण को बढ़ावा देगी। इसका उद्देश्य 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) उत्पादन क्षमता सृजित करना है। इस योजना में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से पाँच लाभार्थियों को कुल क्षमता आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक लाभार्थी को 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक की क्षमता आवंटित की जाएगी।
इस योजना की कुल अवधि ठेका मिलने की तिथि से 7 वर्ष होगी, जिसमें एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए 2 वर्ष की अवधि और आरईपीएम की बिक्री पर प्रोत्साहन राशि वितरण के लिए 5 वर्ष शामिल हैं। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 7,280 करोड़ रुपये है, जिसमें पाँच वर्षों के लिए आरईपीएम की बिक्री पर 6,450 करोड़ रुपये के बिक्री-संबंधी प्रोत्साहन और कुल 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष आरईपीएम विनिर्माण सुविधाएँ स्थापित करने के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल है।

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