गोड्डा
1950 मे 11001का अंशदान से स्कूल का नाम रखा गया राम सुंदर राम उच्च विद्यालय मना रहा हीरक जयंती

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : जिले का उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान राम सुंदर राम +2उच्च विद्यालय बलबड्डा हीरक जयंती मना रहा हैं। इसे लेकर तीन दिनों कार्यक्रम आयोजित हो रहा हैं जो 17से 19दिसंबर तक चलेगा जिसमें बतौर मुख्य अतिथि झारखण्ड सरकार के ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह और विशिष्ट अतिथि के रूप मे उपायुक्त अंजली यादव शिरकत करेंंगी।
ठीक आजादी के बाद आखिर कैसे लोगो 1949 मे स्थानीय लोगो को ये बात लगने की अब जब मुल्क आज़ाद हो ही गया तो क्योँ नहीं घर घर शिक्षा का दीप जलाया जाय। इसके बाद पहली बारबलबड्डा मेला मैदान स्थित पीपल पेड़ के पास आम और खास सभी इस संकल्प के साथ जुटे की गांव मे एक उच्च विद्यालय की नीव रखी जाय। बता दे की 1911मे इलाके का पहला मिडिल स्कूल अंग्रेजी शासन काल मे बलबड्डा मे खुल चूका था तब यही एक मात्र शिक्षा पाने का संस्थान इस क्षेत्र मे था।
इसी संकल्प का नतीजा था की 18दिसंबर 1949 को लोगो का हुजूम जुटा, जिसमें आस पास के कई आम व खास लोग शामिल हुए। सबके चेहरे पर एक उम्मीद थी की अब गांव मे एक स्कूल अस्तित्व मे आएगा जहाँ आगे की पढ़ाई की जा सकेगी।मीटिंग की शुरुआत हुईं जिसकी पहली अध्यक्षता मिडिल स्कूल के तत्कालीन प्रधानाध्यापक चक्रधर झा ने की और सर्व सम्मति से एक कमिटी का गठन हुआ। जिसमें नन्द किशोर तिवारी, घोरिकिता को सचिव बनाया गया वही सदस्यों मे नन्द किशोर भगत(बलबड्डा),छेदी राम (बलबड्डा), अनंत राम (बलबड्डा)के एन दत्ता, अधिवक्ता (बलबड्डा स्टेट),तेजनारायण महतो (मड़पा), पंचानन्द झा (लकड़मरा), मो नजमुद्दीन (डोय), जगरनाथ टंडन (चौरा),बबुआ मांझी (तिलकपुर) और बी के महतो (मेघनाद)शामिल थे। इसके बाद 1950को पहली तिथि से उसी पीपल पेड़ के नीचे बोर्ड लगा कर पढ़ाई शुरु कर दी गई। पढ़ाई की शुरुआत रत्नेश्वर सिंह कोकरा, छेदी तिवारी परसा, मोहन सिंह बाभनिया इन्ही शिक्षकों से आरम्भ हुआ।
इसके उपरान्त ये सवाल उठा की आखिर विद्यालय का नाम क्या रखा जाय। फिर ये घोषणा की गयी जो जो व्यक्ति 10हज़ार या उससे अधिक राशि सहयोग सहायता देगा उसी के नाम से स्कूल बनेगा। शुरूआती घोषणा के बाद कोई आगे नहीं आया फिर समिति के सदस्य छेदी राम ने 11001रुपया दो किश्तो मे देने की बात कही। साथ ही उन्होने अपने पिता राम सुंदर राम के नाम पर स्कूल के रखने की सहमति दी और इस तरह वर्तमान नाम से स्कूल अस्तित्व मे आया।
वर्तमान स्कूल के पास कुल 26.5बीघा जमीन हैं जो सम्भवत आज भी पुरे संथाल परगना प्रमंडल मे भी शायद ही किसी स्कूल को हैं। 1965 ईस्वी मे जब ये विद्यालय हायर सेकेंडरी स्कूल बना तो निर्धारित माप दंड से कम जमीन थी तो छेदी राम ने विद्यालय को 6.5 बीघा जमीन परवल कित्ता मे दिया। विद्यालय के निर्माण भू दाता की भी बड़ी फेहरिस्त हैं जिनमे नन्द किशोर भगत, मनोहर भगत,शशि भगत, यमुना सिंह, केश्वर सिंह,मुशन राम, पाली राम, श्रीधर राम, नन्द किशोर राम, चौधरी पासवान, रामचरित महतो, घुरो महतो, बलबड्डा स्टेट, छेदी राम सहित अन्य लोग शामिल थे। आज बलबड्डा स्कूल 75साल का हो गया हैं। पुरे क्षेत्रने मे इसे लेकर काफ़ी उत्साह का माहौल हैं। इसके अलावा भी समाज के कई उस दौर के लोगो की बड़ी भूमिका रही। आज जहाँ हीरक जयंती पर लोग पूर्वजो को याद कर रहे जिनके प्रयासों से इतना बड़ा काम हुआ वही इस मुहीम के बड़े हस्ताक्षर मे श्याम सुंदर साह, सूर्यनारायण साह,राधे भगत जैसे लोगो की भूमिका महत्वपूर्ण रहीं। जिन्होंने विद्यालय निर्माण जैसे कार्यों मे बढ़ चढ़ कर भागीदारी निभाई। इन सबके अलावा बलबड्डा मे सैकड़ो मजदूरों की भूमिका को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता हैं जिन्होंने श्रम दान दिया और जरुरत पढ़ने पर मिट्टी काटी व जब वक्त आया इंट लगाई। आज उनकी मेहनत का परिणाम हैं विद्यालय लाखो लोगो के जीवन मे शिक्षा की जोत जला रहा हैं।इस तरह पहला छात्र जिसने प्रथम श्रेणी से पास करने वाले स्कुल का पहला छात्र होने का गौरव प्राप्त किया वो विद्यानंद साह थे। जो आगे चलकर उच्च विद्यालय के हेडमास्टर बन के सेवा निबृत हुए और ये कारवां लगातार 75सालो से जारी हैं जिसने कई नाम शामिल हैं जिसने बुलंदियों को प्राप्त किया है।



