मुरादाबाद

धान छोड़ कोदो की खेती की ओर बढ़े किसान, कम लागत में ज्यादा मुनाफा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। कोदो एक ऐसी फसल है जो कम उपजाऊ भूमि और ऊंचाई वाले खेतों में भी आसानी से उगाई जा सकती है। यह उन क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है जहां धान की खेती संभव नहीं है।
सरकार द्वारा मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती को प्रोत्साहन देने का सीधा फायदा अब किसानों को मिल रहा है। परंपरागत धान की खेती से हटकर अब जिले के कई किसान कोदो की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। खासकर बिलारी क्षेत्र के किसान इस फसल से अच्छा लाभ कमा रहे हैं।
यह चावल बीपी और शुगर के मरीजों के लिए रामबाण
कृषि विशेषज्ञ डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार कोदो एक ऐसी फसल है जो कम उपजाऊ भूमि और ऊंचाई वाले खेतों में भी आसानी से उगाई जा सकती है। यह उन क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है जहां धान की खेती संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ कोदो की बुवाई के लिए लगभग 6 से 7 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। खेत की हल्की जुताई करके पहली बारिश में ही इसकी बुवाई कर दी जाती है। बाजार में इसकी अच्छी मांग है। मुरादाबाद में व्यापारी कोदो को किसानों के घर से ही 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रहे हैं। वहीं अगर किसान इसका चावल बनाकर बेचते हैं, तो यह 120 से 130 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इसकी खासियत यह है कि यह चावल बीपी और शुगर के मरीजों के लिए रामबाण की तरह काम करता है, यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
बिलारी के किसान न केवल इस फसल से लखपति बन रहे हैं, बल्कि वे दूसरे किसानों को भी मोटे अनाज की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरकार की योजनाओं और वैज्ञानिक सलाह के चलते कोदो की खेती जिले में नए विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है।
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