बोकारो के 08 उपायुक्त पर चल सकता है कानून का हथौड़ा
The hammer of law may fall on 08 Deputy Commissioners of Bokaro.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
बोकारो। बोकारो के 08 उपायुक्त एक बड़े घोटाले को लेकर कानून की चपेट में आ सकते हैं। ये सभी एक ऐसे #फंड के घपले – घोटाले के आरोपी बन सकते हैं जो अपने निर्माण काल से ही गलत तरीके से खर्च किया गया। अरबों के इस घोटाले में संभव है कि बोकारो के इन 08 #उपायुक्तों का नाम जल्द ही सुर्खियों में हो। झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो में वर्ष 2016 से अबतक डी एम एफ टी फंड के हुए घोटाले की सुनवाई शुरू कर दी है। 13 अक्टूबर को झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में डीएमएफटी फंड में अनियमितता की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायालय ने डीएमएफटी में 11 अरब रुपये के घोटाले पर सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना काम किए ही राशि निकाल ली गई। कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर घोटाले के आरोपों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है और पूछा है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है ? हाई कोर्ट में इस मामले में चल रही सुनवाई के दौरान इस संबंध में राजकुमार ने हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि बोकारो में डीएमएफटी फंड की लूट हुई है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए वकील मिश्रा ने कहा कि वर्ष 2016 से लेकर अबतक बोकारो में इस फंड से 11 अरब की लूट हुई है। बिना #टेंडर के ही काम दिए गए। बिना काम पूर्ण हुए ही भुगतान कर दिया गया। प्रार्थी ने इस मामले की जांच सी बी आई से कराने की मांग की है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए 04 सप्ताह बाद इस मामले पर पुनः सुनवाई करने का आदेश जारी किया है। डीएमएफटी अर्थात डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन। इसकी स्थापना केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद वर्ष 2015 में खान और खनिज संशोधन अधिनियम के तहत हुई। वर्ष 2015 में आए इस अधिनियम के तहत राज्य सरकारों को अपने – अपने खनन प्रभावित जिलों में ट्रस्ट की स्थापना का अधिकार मिला और इसके आधार पर डी एम एफ टी फंड की स्थापना हुई। इसमें इस क्षेत्र में काम करने वाली कोल कंपनियों द्वारा सरकार द्वारा तय राशि डाली जाती है। इस फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के कल्याण और विकास के लिए करने का नियम है। बोकारो में भी विशेष कर #बेरमो अनुमंडल का क्षेत्र खनन प्रभावित है। सो यहां भी इस ट्रस्ट के तहत डी एम एफ टी का गठन हुआ। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष होते हैं जिला उपायुक्त और अन्य लोग सदस्य। कोर्ट में जो मामला है, उसके अनुसार वर्ष 2016 से ही इस फंड का दुरुपयोग शुरू हो गया और मात्र 09 वर्ष में 11 अरब रुपए का घपला – घोटाला हो गया। अब इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है।
#बोकारो में वर्ष 2016 से लेकर अब तक 08 डीसी काम कर चुके हैं और वर्तमान में 09 वें डीसी के रूप में अजय नाथ झा कार्य कर रहे हैं। जब #देश में डी एम एफ टी अस्तित्व में आया तब बोकारो के डीसी की कुर्सी पर विराजमान थे राय महिमापत रे। इसके बाद आए मृत्युंजय बरनवाल, फिर शैलेश कुमार चौरसिया, कृपानंद झा, मुकेश कुमार, राजेश कुमार सिंह, कुलदीप चौधरी और विजया जाधव ( देखें नीचे इनके कार्यकाल की सूची ) । विजया जाधव के कार्यकाल में यह मामला सुर्खियों में आया और अब कोर्ट में है। संभव है कि वर्तमान जिला कलेक्टर अजय नाथ झा के कार्यकाल में इस फंड का दुरुपयोग न हो पाया हो क्योंकि इनके आते ही यह मामला मीडिया के द्वारा राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया। अंत में, देखना यह है कि इस मामले में #झारखंड सरकार क्या ज़बाब देती है। इतना तो तय है कि अगर 11 अरब रुपए का केवल बोकारो में घोटाला होने का आरोप है तो राज्य ( जो खनिज सम्पदा से भरा हुआ है, उसके अन्य जिले भी इस फंड के दुरुपयोग से वंचित नहीं होंगे। ) में इस फंड का घोटाला कितना बड़ा होगा, अंदाज लगाना मुश्किल है। देखना यह भी होगा कि वर्ष 2016 से 2025 तक उपरोक्त 08 में से किन – किन कलेक्टर महोदय ने इसके दुरुपयोग में भूमिका निभाई है और कोर्ट किसको – किसको इस मामले में नोटिस जारी करता है ?



