मुरादाबाद

नगर निगम की कार्यवाही से उजड़े घर एक घर को बख्शने पर उठे सवाल 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। सड़क किनारे बैठी रजनी कश्यप की आंखों में आंसू और आवाज़ में गुस्सा है। घर के टूटे हुए दरवाजे और बिखरा हुआ सामान उनके पीछे बेजान पड़ा है। मंगलवार को नगर निगम की टीम ने सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में तीन मकानों को खाली करा दिया। इनमें रजनी का घर भी शामिल है।
नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं
अगर जमीन सरकारी है तो हम छोड़ देंगे लेकिन सवाल ये है कि हमारा ही घर हिटलर शाही की तरह क्यों गिराया गया राजाराम का मकान भी तो इसी जमीन पर है वो क्यों सलामत है। यह सवाल रजनी बार-बार दोहरा रही हैं। रजनी कश्यप ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों के साथ नगर निगम के अधिकारियों की ‘सेटिंग’ है वह पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजाराम का घर इसलिए नहीं तोड़ा गया क्योंकि उसने कमिशन दिया होगा।
60 साल से रह रहे हैं लोग
स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस इलाके में वे कई दशकों से रह रहे हैं। उनके पास बिजली बिल, हाउस टैक्स और अन्य दस्तावेज हैं। “हमने यहां अपने बच्चों की परवरिश की है, शादी-ब्याह किए हैं, अब अचानक हमें कह दिया गया कि ये जमीन तुम्हारी नहीं है, तो हम कहां जाएं? यह कहते हुए पास बैठी एक बुजुर्ग महिला की आंखें नम हो गईं।
नगर आयुक्त की कार्यशैली पर उठाए सवाल
लोगो का कहना है कि नगर आयुक्त के आदेश पर नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया, लेकिन इलाके के लोगों में इसको लेकर गहरा रोष भी है। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने की कवायद थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस कार्रवाई ने नगर आयुक्त की पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकारी जमीन पर कब्जे की बात है तो दूसरी तरफ उन लोगों की जिंदगी जो आधी सदी से वहां रह रहे थे।
स्थानीय लोग कर रहे हैं निष्पक्ष जांच की मांग
फिलहाल नगर निगम की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। वहीं प्रभावित परिवारों ने जिलाधिकारी और शासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर जमीन वाकई सरकारी है तो सभी पर समान कार्रवाई हो।
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