अमरोहा
“सूई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं देंगे”
मंगरौला के किसानों ने लिया कड़ा संकल्प, पूर्व सीएम अखिलेश यादव से मिलकर उठाई आवाज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमरोहा हसनपुर तहसील क्षेत्र का मामला
अमरोहा उत्तर प्रदेश गंगा एक्सप्रेसवे के निकट स्थित हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव मंगरौला, दौलतपुर, गांगटकोला , ढकिया खादर, हाकमपुर, रुस्तमपुर खादर, सकरगढ़ी, जयांतौली, पतेर्व खादर, गंगवार, वुरावली सहित अन्य गांवों की लगभग 3000 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) में शामिल करने के सरकारी प्रस्ताव के खिलाफ किसानों में रोष व्याप्त है।
किसानों का आरोप है कि सरकार जबरन नाम मात्र के सस्ते रेट पर – मात्र 7 लाख 30 हजार रुपये प्रति बीघा – उनकी जमीन अधिग्रहित करने की कोशिश कर रही है, जबकि यह दर बाजार मूल्य से बहुत कम है।
1 मार्च 2026 को मंगरौला गांव में आयोजित किसान पंचायत में सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अंबेडकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी के नेतृत्व में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अपनी बहुमूल्य उपजाऊ जमीन सरकार को “सूई की नोक के बराबर भी नहीं देंगे”, चाहे इसके लिए जेल जाना पड़े, आत्महत्या करनी पड़े या आत्मदाह करना पड़े।
2 मार्च 2026 को डॉ. दिग्विजय भाटी ने मंगरौला गांव के प्रमुख किसानों – अमरजीत गुर्जर, किरनपाल गुर्जर, देवा गुर्जर, सोनू गुर्जर, मंथन, रूम सिंह सहित अन्य – को पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश माननीय अखिलेश यादव जी से मुलाकात कराई। बैठक में किसानों ने पूरी स्थिति से अवगत कराया।
अखिलेश यादव ने किसानों की समस्या को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को विधायकों के माध्यम से विधानसभा में तथा संसद में भी जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
मौजूद प्रमुख लोग:
डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन बी.आर. अंबेडकर) अमरजीत गुर्जर, किरनपाल गुर्जर , सोनू गुर्जर
देवा गुर्जर , मंथन रूम सिंह अन्य सम्मानित ग्रामीण एवं 219 गांवों के प्रतिनिधि (संभावित क्षेत्रीय संदर्भ) किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने प्रस्ताव वापस नहीं लिया और उचित मुआवजा (राष्ट्रीय राजमार्ग के बराबर) नहीं दिया, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। हाल ही में इसी मुद्दे पर 9 मार्च को डीएम कार्यालय घेराव की भी योजना बनाई गई है।



