मथुरा

गुरु शरणानंद, जिनसे मिलकर रोने लगे प्रेमानंद महाराज? 

अपने आसन पर बिठाकर खुद पखारे पांव

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा। प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज किडनी की समस्या से ग्रस्त चल रहे हैं। उनके डायलिसिस के बीच बिगड़ी तबीयत के मद्देनजर एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह एक संत महाराज का कुटिया के दरवाजे पर लेटकर स्वागत करते और गले मिलकर रोते नजर आ रहे हैं। इसके बाद अपनी गद्दी पर बैठाकर पांव भी पखारते दिखाई पड़े। ये कोई और नहीं, बल्कि प्रेमानंद के गुरु शरणानंद महाराज हैं। इनके बारे में जानते है। धार्मिक परिवार में जन्मे कार्ष्णि गुरु शरणानंद, प्रेमानंद महाराज के अध्यात्मिक गुरु हैं। वह प्रेमानंद महाराज के बहुत करीबी माने जाते हैं और कई बार उनके साथ मिलकर सत्संग भी करवाते हैं। वह भक्‍त‍ि मार्ग के प्रचारक हैं। गुरुकुल में शिक्षा के बाद युवावस्था में ही संन्यास ग्रहण कर अपना जीवन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। संतों के मार्गदर्शक और वैष्णव धर्म के प्रचारक के रूप में कार्य करने वाले गुरु शरणानंद जी महाराज को कार्ष्णि पीठाधीश्वर की उपाधि दी गई है, जो वैष्णव संप्रदाय में एक महत्वपूर्ण धार्मिक पद माना जाता है। शरणानंद जी महाराज ने मथुरा के गोकुल में स्थित रमणरेती में विशाल आश्रम की स्थापना की, जिसे आज कार्ष्णि पीठाधीश्वर रमणरेती आश्रम के नाम से जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी ने अपने बाल्यकाल में रेत में खेला था। आश्रम में संत सेवा, भक्ति और समाज सेवा के कई कार्य संचालित किए जाते हैं। यह आश्रम हिंदू धर्म और वैष्णव परंपरा का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। शरणानंद जी महाराज से मुलाकात और आशीर्वाद लेने वालों में देश के गृहमंत्री अमित शाह और बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृ्ष्ण शास्त्री सहित कई हस्तियां शामिल हैं। वह जब प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे तो केली कुंज आश्रम में सभी की आंखें नम हो गईं। प्रेमानंद ने खुद अपनी गद्दी पर बैठाकर शरणानंद गुरु की सेवा की।
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