झुंझुनू

अरावली बचाने को लेकर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव के विरुद्ध लगे नारे

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं उदयपुरवाटी। सुप्रीम कोर्ट के अरावली फैसले के बाद देशभर में अरावली बचाने को लेकर बहस छिड़ गई है एवं विरोध शुरू हो गए है। उदयपुरवाटी में अरावली बचाने की मांग को लेकर उपखण्ड कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया जिसमें केन्द्र सरकार की नीतियों व केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की गई एवं रैली के रुप मे आकर उपखण्ड अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा गया। ज्ञापन में अरावली की 100 मीटर ऊंचाई संबंधित व्याख्या ओर पुनर्विचार करके अरावली संरक्षण की, अरावली क्षेत्र में खनन ओर अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर कठोर नियंत्रण की मांग की गई। इस अवसर पर मरुसेना फाउंडेशन के एडवोकेट जयन्त मूंड ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में किसी कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की इतनी मजाल कैसे हो गयी कि वो लोग मरुप्रदेश की जीवनदायिनी,आस्था की केंद्र,असंख्य जीव,जन्तुओ एवं पेड़ो की माँ और दुनियां की सबसे प्राचीनतम पर्वतमाला को खनन की मंजूरी के लिए व्याख्या दे रही है। न्यायपालिका से देश नही,देश से ही न्यायपालिका है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव कह रहे है कि अरावली की 100 मीटर वाली परिभाषा कांग्रेस लाई थी यह भ्रामक है। रिकॉर्ड गवाह है कि 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने ऊंचाई-आधारित परिभाषा को अस्वीकार कर वैज्ञानिक मैपिंग एफएसआई का आदेश दिया था जिसकी पालना तत्कालीन सरकार ने की थी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस परिभाषा को कोर्ट 14 साल पहले खारिज कर चुका था, राजस्थान की मौजूदा भाजपा सरकार ने 2024 में उसी की वकालत की। केन्द्र सरकार ने भी इसी परिभाषा को आगे बढ़ाया और यही फैसला सुप्रीम कोर्ट का आया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को कांच के कमरों में बैठकर नही अरावली की गोद के गांव की गलियों में भम्रण करके फैसला करना चाहिए था। सालों से पूरी अरावली क्षेत्र में अवैध खनन से पहाड़ियां तबाह की जा रही है। अब इनको लीगल फरमान केंद्र सरकार ने दे दिया जो सरासर अन्यायपूर्ण है। हमने राजस्थान का सबसे पहला उपखण्ड मुख्यालय घेराव का कार्यक्रम उदयपुरवाटी से शुरु किया है जो मरुप्रदेश भर में किया जाएगा। इसको लेकर बड़ा जनांदोलन भी उदयपुरवाटी की धरती से शुरू हम जल्द करेंगे।
अरावली बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अजय तसीड़ ने कहा कि अरावली हमारी आस्था की केंद्र के साथ साथ इको सिस्टम का मूल आधार है। आज उत्तरी भारत में मरुस्थल का फैलाव होने से रोकने में सिर्फ अरावली ही सहायक है। सैकड़ो छोटी बड़ी नदियों का उदगम,दर्जनों बांधों, करोड़ो पेड़ो, जीव जंतुओं एवं मानव की जीवनदायिनी अरावली पर्वतमाला को चंद कॉरपोरेटस को फायदा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 100 मीटर की पहाड़ियां खनन की परमिशन दे दी गयी जो निंदनीय है। इसको लेकर गांव गांव में अभियान की शुरुआत हम करेंगे। इस अवसर पर एडवोकेट मोतीलाल सैनी,समाजिक कार्यकर्ता सुनीत शेरावत,एडवोकेट हंसराज कबीर, अरावली चेतना संस्थान के संयोजक केके सैनी, पार्षद राकेश जमालपुरिया,पार्षद भगीरथ सैनी,पार्षद श्यामलाल सैनी, पार्षद अमित अली कछावा,पूर्व सरपंच बुधराम सैनी बजावा,पूर्व पंचायत समिति सदस्य हंसा वर्मा,एडवोकेट रणवीर तसीड़,अनिल तंवर इंद्रपुरा,एडवोकेट जितेन्द्र सिंह गिरवाड़ी, समाजिक कार्यकर्ता अनिल सैनी,मोहन लाल सैनी गुढ़ा, मोनू मिटावा,छात्रनेता गणेश सैन, पूर्व पार्षद करणी राम बागड़ी,कॉमरेड नत्थू सैनी चंवरा,छात्रनेता लोकेश झाझड़िया,सोनू शर्मा,विश्वास शर्मा,दिनेश चौधरी,कर्ण सिंह सहित सैकड़ों पर्यावरणविद्ध मौजूद थे।
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