पाकुड़

रेल उपेक्षा के खिलाफ पाकुड़–साहिबगंज में जनआंदोलन तेज, JMM सांसद विजय हांसदा का खुला समर्थन

Public agitation intensifies in Pakur-Sahibganj against railway neglect, JMM MP Vijay Hansda openly supports

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। राजमहल लोकसभा क्षेत्र में रेल सुविधाओं की बहाली और विस्तार की मांग को लेकर पाकुड़ व साहिबगंज जिले में चल रहा जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आन्दोलन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसद विजय हांसदा का समर्थन मिला है। सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि रेलवे द्वारा लगातार की जा रही उपेक्षा के कारण अब जनता के पास आन्दोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सांसद विजय हांसदा ने कहा कि COVID-19 महामारी के दौरान बंद की गई लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों को पुनः शुरू करने, पाकुड़ और साहिबगंज होकर गुजरने वाली प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव तथा पत्थर और कोयले के परिवहन पर रेलवे द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों को हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इन मांगों को लेकर रेल अधिकारियों और रेल मंत्री को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, साथ ही संसद में भी यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि रेलवे के इस रवैये से क्षेत्र के लोगों में गहरी नाराजगी है। यही कारण है कि जनता ने मजबूर होकर आन्दोलन का रास्ता अपनाया है। सांसद ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा जनता के इस आन्दोलन के साथ मजबूती से खड़ी है और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक रेलवे से किसी भी तरह की वार्ता नहीं की जाएगी। विजय हांसदा ने यह भी कहा कि पाकुड़ और साहिबगंज जिलों से मालदा और हावड़ा रेलवे डिवीजन को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद यहां के रेल यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन क्षेत्रों से अपेक्षाकृत कम राजस्व मिलता है, वहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि पाकुड़ और साहिबगंज के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया गया है।
गौरतलब है कि रेल सुविधाओं और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर दोनों जिलों के आम नागरिकों और व्यापारियों ने संयुक्त रूप से आंदोलन की शुरुआत की है। आन्दोलन के तहत सबसे पहले मालपहाड़ी रेलवे साइडिंग और साहिबगंज जिले की रेलवे साइडिंग पर मालगाड़ियों में पत्थर की लोडिंग बंद की गई। जब रेलवे की ओर से कोई समाधान नहीं निकला, तो पाकुड़ जिले की दो खदानों से पश्चिम बंगाल और पंजाब के पावर प्लांटों को भेजे जाने वाले कोयले की लोडिंग भी रोक दी गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक रेलवे उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

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