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केरल में गंभीर रूप लेता जा रहा है ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ रोग

नई दिल्ली । केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस ( ब्रेन ईटिंग अमीबा) रोग के कारण कुल मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। आसपास के जिलों में तेजी से बढ़ती इस बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। हाल के वर्षों में भारत में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन रोगों से जो राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं केरल उनमें शीर्ष पर है। हाल के महीनों में केरल में ब्रेन ईटिंग अमीबा संक्रमण बड़ा खतरा बनकर उभरा है। विशेष रूप से कोझिकोड जिले और इसके आसपास के क्षेत्रों में ये बीमारी काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में इस रोग से एक और मरीज की मौत हो गई है। इसके साथ केरल में अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस ( ब्रेन ईटिंग अमीबा) रोग के कारण कुल मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। आसपास के जिलों में तेजी से बढ़ती इस बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

अधिकारियों ने बताया कि मलप्पुरम जिले में शाजी (47) नामक व्यक्ति की गुरुवार को मौत हो गई। इसके साथ पिछले एक महीने में केरल में तथाकथित “दिमाग खाने वाले” संक्रमण से मरने वालों की संख्या छह पहुंच गई है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के अनुसार, शाजी को 9 अगस्त को भर्ती कराया गया था। उनकी हालत गंभीर हो गई और गुरुवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने कहा, अभी यह पुष्टि की जा रही है कि उन्हें संक्रमण कैसे हुआ?

गौरतलब है कि अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस मुख्य रूप से दूषित पानी में मौजूद अमीबा के संपर्क में आने के कारण होता है। वर्तमान में, कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में संक्रमण के लिए 10 मरीजों का इलाज चल रहा है। इससे पहले सोमवार को, मलप्पुरम जिले में 54 वर्षीय महिला की भी इस बीमारी से मृत्यु हो गई थी।

जुलाई से लगातार सामने आ रहे इस संक्रामक रोग के मामलों के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने राज्य के उत्तरी जिलों में कुओं और तालाबों के क्लोरीनीकरण सहित सफाई अभियान को और तेज कर दिया है साथ ही सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है।

पिछले महीने एक बच्ची की हुई थी मौत

पिछले महीने 16 अगस्त को भी कोझिकोड जिले में संक्रमण के कारण नौ साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी। फ्री-लिबिंग अमीबा के कारण होने वाला अमीबिक इंसेफेलाइटिस एक घातक संक्रमण है, जिसका मृत्युदर काफी अधिक देखा जाता रहा है। गौरतलब है कि केरल में पहले भी इस संक्रमण मामले देखे जाते रहे हैं। इसे ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ भी कहा जाता है। पिछले साल भी केरल के कई जिलों में इस संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए थे।

क्या है अमीबिक इंसेफेलाइटिस संक्रमण?

अमीबिक इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क का एक दुर्लभ और घातक संक्रमण है। ये नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा के संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है। यह संक्रमण मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करने लगता है जिससे ज्यादातर मामलों में मस्तिष्क में गंभीर सूजन और मृत्यु हो जाती है।

पानी में गोते लगाने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है, संक्रमण की आशंका तब अधिक हो सकती है जब दूषित पानी नाक में प्रवेश कर जाता है। संक्रमितों में शुरूआती लक्षण आमतौर पर फ्लू की तरह होते हैं जिसमें सिरदर्द, बुखार, मतली और उल्टी की दिक्कत हो सकती है।




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