गाजियाबाद

IGRS पर ‘अधिनियम बता कर पल्ला झाड़ने’ का आरोप

लोनी नगरपालिका की जांच आख्या पर उठे गंभीर सवाल, शासनादेश की अनदेखी का मामला

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण को लेकर लोनी नगरपालिका परिषद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड संख्या-41, जौहरी रोड निवासी सोहनबीर सिंह पुत्र रामकिशन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 40014026017546 के निस्तारण में जांच अधिकारी की आख्या पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वास्तविक समस्या का समाधान किए बिना केवल औपचारिक टिप्पणी कर शिकायत को निस्तारित किया गया है।
शिकायतकर्ता ने 29 मार्च 2026 को दर्ज कराई अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जौहरीपुर रोड स्थित सत्यम सिनेमा के पास कुछ लोगों ने टिन शेड, लकड़ी के खोखे और पुराने टायर रखकर अवैध रुप से कब्जा कर रखा है। साथ ही मार्ग पर ऑटो मरम्मत एवं वेल्डिंग का कार्य होने से क्षेत्र में जाम और प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। शिकायत में नगरपालिका अधिकारियों पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया था।
मामले की जांच नगरपालिका परिषद लोनी की अवर अभियंता श्रीमती नीलम द्वारा की गई। अपनी आख्या में उन्होंने केवल इतना उल्लेख किया कि संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नगरपालिका अधिनियम  1916 के अंतर्गत कार्रवाई कर दी गई है। लेकिन आख्या में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कार्रवाई किन व्यक्तियों के खिलाफ की गई, क्या कार्रवाई की गई, उसका परिणाम क्या रहा और अवैध कब्जा हटाने के लिए मौके पर कौन-से ठोस कदम उठाए गए।
शासनादेश की भावना के विपरीत आख्या?
विशेष बात यह है कि 21 दिसंबर 2022 को जारी शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि केवल औपचारिक या सामान्य भाषा लिखकर संदर्भों का निस्तारण नहीं किया जाएगा। शासनादेश में कहा गया है कि “इस प्रकार की भाषा अंकित करते हुए संदर्भ निस्तारित न किए जाएं, अपितु संदर्भ का संज्ञान लेकर समुचित कार्रवाई कर उसकी विस्तृत आख्या अपलोड की जाए।”
ऐसे में जांच अधिकारी द्वारा केवल यह लिख देना कि “धारा 1916 के अंतर्गत कार्रवाई कर दी गई है” कई सवाल खड़े कर रहा है। न तो कार्रवाई का विवरण दिया गया और न ही शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए मूल मुद्दों के समाधान की स्थिति स्पष्ट की गई। इससे यह आशंका बलवती हो रही है कि शिकायत के वास्तविक निस्तारण के बजाय कागजी प्रक्रिया पूरी कर मामले को बंद करने का प्रयास किया गया।
तीन माह बाद भी शिकायत की ज्यों की त्यों बनी हुई है स्थिति
शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के लगभग ढाई माह बाद भी मौके की स्थिति में कोई  बदलाव नहीं दिखाई देता। यदि वास्तव में कार्रवाई की गई थी तो उसके प्रभाव का उल्लेख आख्या में होना चाहिए था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में तथ्यों और कार्रवाई का अभाव दर्शाता है कि मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
गलत या भ्रामक आख्या पर कार्रवाई के निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जनसुनवाई पोर्टल पर बिना समुचित जांच के भ्रामक अथवा अपूर्ण आख्या लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। असंतोषजनक निस्तारण, गलत रिपोर्ट अथवा बिना मौके के सत्यापन के आख्या लगाने पर संबंधित अधिकारियों का वेतन रोके जाने, कारण बताओ नोटिस जारी करने और प्रतिकूल प्रविष्टि देने तक के प्रावधान हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता सोहनबीर सिंह ने जांच अधिकारी की आख्या पर आपत्ति जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वास्तविक कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि IGRS पर शिकायतों का निस्तारण इसी प्रकार औपचारिक टिप्पणियों के आधार पर किया जाता रहा तो जनसुनवाई प्रणाली पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित जांच अधिकारी की आख्या 21 दिसंबर 2022 के शासनादेश की भावना और निर्देशों के अनुरूप है, या फिर शिकायत के वास्तविक समाधान के बिना उसे निस्तारित दिखाने का प्रयास किया गया है। इस मामले में उच्चाधिकारियों का रुख आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।
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