लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
1995 बैच के 5 वरिष्ठ आईएएस को अपर मुख्य सचिव का दर्जा, केंद्र में तैनात 3 अफसरों को प्रोफार्मा प्रमोशन

लखनऊ – उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की शीर्ष प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण पदोन्नति और दर्जा वृद्धि का फैसला लिया है। कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग द्वारा आज जारी आदेश के तहत 1995 बैच के पांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को प्रमुख सचिव से पदोन्नत कर अपर मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary) का दर्जा प्रदान किया गया है।
यह प्रमोशन उन अधिकारियों को दिया गया है, जिन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं और जिनकी अपर मुख्य सचिव स्तर की पदोन्नति लंबित थी। यह कदम राज्य में उच्च स्तरीय निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने और प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव का दर्जा प्राप्त करने वाले अधिकारी:
आईएएस आशीष गोयल, आईएएस संजय प्रसाद ,आईएएस अमृत अभिजात ,आईएएस आर. रमेश कुमार,आईएएस मुकेश मेश्राम, ये सभी अधिकारी अब अपर मुख्य सचिव के उच्चतर वेतनमान और दर्जे पर कार्यरत रहेंगे, हालांकि उनकी वर्तमान पोस्टिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह प्रोन्नति उन्हें भविष्य में केंद्र स्तर की उच्च पदोन्नतियों में वरिष्ठता का लाभ भी प्रदान करेगी।
केंद्र में तैनात अधिकारियों को प्रोफार्मा प्रमोशन:उत्तर प्रदेश कैडर के तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को केंद्र में तैनाती के दौरान प्रोफार्मा प्रमोशन (notional promotion) प्रदान किया गया है, ताकि उनकी वरिष्ठता और पेंशन संबंधी लाभ प्रभावित न हों:आईएएस भुवनेश कुमार ,आईएएस
मृत्युंजय नारायण ,आईएएस संतोष यादव
योगी सरकार का उद्देश्य:
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह पदोन्नति योगी आदित्यनाथ सरकार की सुशासन नीति का हिस्सा है, जिसमें योग्य और अनुभवी अधिकारियों को समय पर उचित दर्जा और जिम्मेदारी प्रदान की जाती है। इससे विभिन्न विभागों में बेहतर समन्वय, तेज निर्णय प्रक्रिया और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की यह पदोन्नति राज्य के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शासन की स्थिरता और निरंतरता को दर्शाता है।




