गुरु आत्मा का पोषण करते हैं, शरीर का नहीं : आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज
धर्मसभा में आत्मा से परमात्मा बनने की दिशा में मिली प्रेरणा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : कौशल भवन सभागार में आज एक विशेष धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें वात्सल्य दिवाकर गुरु तीर्थ निर्मलायतन के प्रणेता जागृति करी संत आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज ने गूढ़ और प्रेरणादायक प्रवचन दिए।
उन्होंने कहा, “आत्मा को परमात्मा में कैसे परिवर्तित किया जाए, यह हमें ‘पंचकल्याणक’ से सीखने को मिलता है। गुरु इस संसार की सर्वश्रेष्ठ शक्ति हैं। मां-बाप शरीर को पालते हैं, लेकिन गुरु आत्मा का पोषण करते हैं।”
आचार्य श्री ने गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु का ज्ञान किसी मापदंड में नहीं मापा जा सकता। गुरु न केवल दिशा दिखाते हैं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
धर्मसभा में जैन समाज के कई प्रमुख लोग शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से:
प्रवीण जैन, मनोज कुमार जैन, मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र जैन कानूनगो, मनोज जैन संभव, पुनीत जैन, दिनेश जैन, अनुराग मोहन, पवन जैन, राकेश जैन, सतीश जैन, अमित जैन आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के विचारों को आत्मसात करते हुए धर्मसभा को सफल बनाया और जीवन में गुरु की भूमिका को सर्वोपरि माना।



