
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले में झारखंड के बोकारो निवासी डॉ. विवेक मिश्रा को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को गुजरात कैडर का 2014 बैच का IAS अधिकारी बताकर 150 से अधिक लोगों से नौकरी के नाम पर 80 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था। यह गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. आशुतोष मिश्र की शिकायत के आधार पर हुई, जिन्होंने आरोपी के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया।
ठगी का जाल और तरीका:पुलिस के अनुसार, विवेक मिश्रा ने सोशल मीडिया पर कई फर्जी अकाउंट्स बनाए थे, जिनके जरिए वह खुद को गुजरात सरकार में सचिव के पद पर तैनात बताता था। वह विशेष रूप से सीधी-सादी युवतियों को निशाना बनाता था, उन्हें IAS, IPS और अन्य सरकारी नौकरियों का लालच देकर पैसे ऐंठता था। फर्जी दस्तावेज, फोटोशॉप्ड तस्वीरें और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर वह अपनी बातों को विश्वसनीय बनाता था।लखनऊ पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने जांच में पाया कि आरोपी ने देशभर में 150 से अधिक लोगों को ठगा, जिसमें से कई पीड़ितों ने लाखों रुपये गंवाए। पुलिस ने उसके पास से कई फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया।
कानूनी कार्रवाई और जांच लोगों से सतर्कता की अपील:लखनऊ पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, संपत्तियों और संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है। डीसीपी (साइबर क्राइम) ने बताया कि यह एक संगठित ठगी का नेटवर्क हो सकता है, और जांच को अन्य राज्यों तक विस्तारित किया जा रहा है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नौकरी के वादों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी नियुक्ति या ऑफर की प्रामाणिकता को आधिकारिक चैनलों से सत्यापित करें। यह मामला एक बार फिर नौकरी के नाम पर होने वाली ठगियों के प्रति सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।



