
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत। आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के तत्वावधान में चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल, बड़ौत में आयोजित आवासीय संस्कार शिविर के दूसरे दिन बेटियों को वैदिक संस्कृति, आत्मबल, शारीरिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से परिचित कराया गया। शिविर में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बालिकाओं के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक यज्ञ एवं प्रार्थना के साथ हुई। इस दौरान सविता आर्या ने बालिकाओं को यज्ञ की विधि एवं उसके आध्यात्मिक महत्व की जानकारी देते हुए स्वयं यज्ञ करना सिखाया। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कार व्यक्ति के जीवन को अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं।
शिविर में शिक्षिका जया तिवारी ने प्रातःकालीन सत्र में पीटी, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार तथा जूडो-कराटे का प्रशिक्षण कराया। उन्होंने कहा कि बेटियों का शारीरिक रूप से मजबूत होना समय की आवश्यकता है। जब तक बेटियां आत्मविश्वासी और सशक्त नहीं होंगी, तब तक राष्ट्र का भविष्य भी पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं हो सकता। उन्होंने बालिकाओं को आलस्य त्यागकर नियमित व्यायाम, अनुशासन और सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा दी।
सभा मंत्री रवि शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की निर्माता भी होती है। एक शिक्षित, संस्कारी और जागरूक महिला पूरे परिवार को सही दिशा देने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन में माता द्वारा दिए गए संस्कार ही उनके व्यक्तित्व और भविष्य की नींव बनते हैं।
मुंबई से पधारे ब्रह्मचारी अरुण आर्य वीर ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि माता जीजाबाई ने बालक शिवाजी को बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, साहस और धर्मनिष्ठा के संस्कार देकर उन्हें महान योद्धा और राष्ट्रनायक बनाया। उन्होंने कहा कि आज की माताओं और बेटियों को भी ऐसे ही आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देना चाहिए।
शिविर में उपस्थित अतिथियों एवं पदाधिकारियों ने बालिकाओं को वैदिक संस्कृति, चरित्र निर्माण, शिक्षा और आत्मरक्षा के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष तोमर, धर्मपाल त्यागी, कपिल आर्य, जागृति मिश्रा, सिमरन आर्या, तन्वी आर्या, हरेंद्र आर्य सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
संस्कार शिविर में बेटियों के उत्साह और सक्रिय सहभागिता ने यह संदेश दिया कि संस्कार, शिक्षा और आत्मबल के माध्यम से ही सशक्त नारी और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।



