बरेली
सर्किट हाउस में हुई मंडलीय समीक्षा बैठक
सीएम ने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों से लिया फीडबैक, विभागीय लापरवाही पर अधिकारियों को दी चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। गुरुवार शाम हालात कुछ ऐसे थे मानो पूरा शहर एक ही वक्त में कई मोर्चों पर धड़क रहा हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन के साथ प्रशासनिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई। सर्किट हाउस में हुई मंडलीय समीक्षा बैठक में सीएम ने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर अधिकारियों से कड़ा फीडबैक लिया। चेतावनी साफ थी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, धर्मपाल सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, जेपीएस राठौर, अरुण कुमार सक्सेना सहित सांसद, मेयर, विधायक और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री मेयर डॉ. उमेश गौतम के कैंपस कार्यालय पहुंचे और उनके पुत्र पार्थ गौतम व बहू जान्हवी को आशीर्वाद दिया। इसके बाद आईवीआरआई मैदान में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के पुत्र अपूर्व के विवाह समारोह में शामिल हुए। महज दो घंटे के प्रवास में सीएम ने प्रशासन से लेकर सामाजिक मंच तक अपनी मौजूदगी का असर छोड़ा और फिर लखनऊ रवाना हो गए। लेकिन सर्किट हाउस के बाहर माहौल बिल्कुल अलग था। सीएम की बैठक चल रही थी कि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जनप्रतिनिधियों की गाड़ियां रोकनी शुरू कर दीं। इससे भाजपा के बड़े नेताओं एमएलसी संतोष सिंह और ब्रज प्रदेश अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य भड़क उठे। दोनों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हमारी गाड़ियां नहीं जाएंगी तो यह आपकी कार्यप्रणाली पर सवाल है। हंगामे के बाद ही गाड़ियों को भीतर जाने दिया गया, हालांकि वीवीआईपी को छोड़ बाकी वाहनों को बाहर ही रोक दिया गया। इसी दौरान सनराइज अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाते हुए पीड़िता लक्ष्मी देवी अपने परिजनों के साथ सीएम से मिलने पहुंची। उनका आरोप था गलत इलाज के कारण पति की मौत हुई और अस्पताल ने पोस्टमार्टम तक नहीं होने दिया। लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने उन्हें तुरंत वहां से हटाया गया। पीड़ित परिवार रोता रहा न्याय के लिए आए हैं, पर मिलने भी नहीं दिया जा रहा। पूरा शहर दो घंटे तक सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों में उलझा रहा और प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्था और सुरक्षा के हर मोर्चे पर मुस्तैद दिखाई दिए। एसएसपी अनुराग आर्य ने पहले ही 1200 पुलिसकर्मी तैनात कर दिए थे और चेतावनी दी थी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। नतीजा यह रहा कि आम नागरिक से लेकर बड़े नेता तक सब सुरक्षा घेरे की कसौटी पर कसते नजर आए।




