बेतुल
बैतूल मनरेगा में बदलाव के खिलाफ कांग्रेस का जिलेभर में शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार विरोध
मनरेगा कानून में बदलाव से मचा हड़कंप, पीपीपी मेडिकल कॉलेज बना नया विवाद

भाजपा की नीति बनाम जनता की जरूरत, सड़कों पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता
आदिवासी अंचल को निजीकरण की प्रयोगशाला बना रही सरकार: निलय विनोद डागा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। भाजपा सरकार द्वारा महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के कानून में किए गए बदलाव के खिलाफ कांग्रेस ने आज निर्णायक तेवर दिखाए। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बैतूल जिले के विभिन्न ब्लॉक मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। बैतूल ग्रामीण क्षेत्र का मुख्य धरना प्रदर्शन खेड़ी सावलीगढ़ में आयोजित हुआ, जहां कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय डागा शामिल हुए और सरकार की नीतियों को सीधे तौर पर गरीब, मजदूर और आदिवासी विरोधी करार दिया गया।
धरना स्थल पर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने मनरेगा जैसे जनकल्याणकारी कानून की आत्मा को ही बदल दिया है। जिस योजना को ग्रामीण गरीबों के लिए वैधानिक रोजगार का अधिकार बनाया गया था, उसी अधिकार को अब कागजी औपचारिकताओं और नियमों की जंजीरों में जकड़ दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि काम मांगने पर काम देने की बाध्यता को कमजोर कर सरकार ने मजदूरों को फिर उसी अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है, जिससे उबारने के लिए मनरेगा लाई गई थी।
– भूख, बेरोजगारी और पलायन की ओर धकेलता फैसला
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा में बदलाव का सबसे बड़ा असर आदिवासी और ग्रामीण अंचलों पर पड़ेगा। बैतूल जैसे जिले, जहां बड़ी आबादी मजदूरी पर निर्भर है, वहां रोजगार की गारंटी कमजोर होने का मतलब भूख, बेरोजगारी और मजबूरी में पलायन है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय विनोद डागा ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां लगातार गरीबों के अधिकार छीनने की दिशा में बढ़ रही हैं। एक तरफ रोजगार की गारंटी कमजोर की जा रही है, दूसरी तरफ शिक्षा और स्वास्थ्य को भी बाजार के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
– अब इलाज भी मुनाफे के हवाले
धरना प्रदर्शन के दौरान बैतूल जिले में प्रस्तावित पीपीपी मोड मेडिकल कॉलेज का भी विरोध किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल जिले में निजी भागीदारी के नाम पर मेडिकल कॉलेज खोलना जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। पीपीपी मॉडल का मतलब साफ है कि इलाज सस्ता नहीं, बल्कि मुनाफे पर आधारित होगा, जिससे गरीब और आदिवासी मरीजों की पहुंच इलाज से और दूर हो जाएगी।
– आदिवासी अंचल प्रयोगशाला नहीं है
कांग्रेस जिला अध्यक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार आदिवासी अंचलों को निजीकरण की प्रयोगशाला बना रही है। जहां सरकारी मेडिकल कॉलेज की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां पीपीपी मॉडल थोपकर स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि जब सरकार के पास उद्योगपतियों को छूट देने के लिए पैसा है, तो आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए क्यों नहीं।
– संघर्ष जारी रहेगा
धरना प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि मनरेगा के वैधानिक अधिकार से छेड़छाड़ और पीपीपी मोड मेडिकल कॉलेज जैसे फैसलों के खिलाफ आंदोलन और तेज होगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई राजनीति की नहीं, रोजगार और इलाज जैसे बुनियादी अधिकारों की है, और इसमें किसी भी कीमत पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
– धरना प्रदर्शन में यह रहे मौजूद
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार चौबे, जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ राने किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जगदीश गोचरे,ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मोनू बडोनिया, पूर्व सरपंच यतीन्द्र सोनी, विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतेश गंगारे, ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पवांर, जनपद सदस्य सुक्कल उईके, भाऊराव धोटे, युवक कांग्रेस के महासचिव गोलू भूमरकर, आईटीसेल के विधानसभा अध्यक्ष करण सिंह, प्रहलाद दवंडे, सुभाष पवांर, संदीप राजपूत ,कमलेश धोटे, राजेश पवांर,गणेश बारस्कर, सुभाष बड़ोदे, बलिराम पवांर, पिन्टू लिखितकर, आर.के.पंडाग्रे, मनीष प्रजापति, शेखर चढ़ोकार, नितेश बारस्कर, राजेन्द्र कालभोर, विजय चौबे, प्रकाश बघेल, सुरेश कोशे सहित सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



