गाजियाबाद

लोनी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में अनियमितताओं का आरोप

विधायक मदन भैया ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, अधिकारियों व एजेंसी पर कार्रवाई की मांग।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

गाज़ियाबाद। लोनी नगरपालिका परिषद क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कार्य को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। खतोली से राष्ट्रीय लोकदल के विधायक मदन भैया ने नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मामले की व्यापक जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों और अनुबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पांच वर्षों से एक ही एजेंसी को काम, अनुबंध समाप्त होने के बाद भी नई निविदा जारी नहीं — आरोप
विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि लोनी नगरपालिका में पिछले पांच वर्षों से एक ही एजेंसी से सफाई कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद भी नई निविदा जारी नहीं की गई, जिससे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका प्रबल होती है। इसके लिए अधिशासी अधिकारी लोनी के.के. मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया गया है।
ESI-EPF कटौती के बावजूद जमा न करने का आरोप, श्रमिकों ने भी की शिकायत
शिकायत के अनुसार, सफाई कार्य में लगे लगभग 1800 श्रमिकों की संख्या को रिकॉर्ड में कम दर्शाया गया, जबकि उनके ESI व EPF की कटौती होने के बावजूद राशि जमा नहीं की गई। श्रमिकों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर नियमित भुगतान न मिलने और सुविधाओं से वंचित रखने की शिकायत भी की।
जांच समिति की रिपोर्ट में संसाधन और श्रमिकों की कमी उजागर
विधायक मदन भैया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मेरठ मंडलायुक्त और जिलाधिकारी गाज़ियाबाद के स्तर पर जांच समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट में अनुबंध के अनुसार संसाधनों और श्रमिकों की कमी पाई गई। इसके बावजूद दोषी एजेंसी पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
“दो वर्षों से लटकी कार्रवाई, हर माह चार करोड़ का भुगतान फिर भी जारी” — विधायक
मदन भैया का आरोप है कि शिकायतें और जांच होने के बाद भी दो वर्ष बीत जाने पर भी अंतिम कार्रवाई लंबित है। इसके विपरीत, अधिशासी अधिकारी द्वारा एजेंसी को प्रतिमाह लगभग चार करोड़ रुपये का भुगतान लगातार किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार ESI-EPF सत्यापन के बाद ही भुगतान होना चाहिए था।
कानूनी कार्रवाई और नई निविदा जारी करने की मांग
विधायक मदन भैया ने कहा कि यह मामला श्रमिकों के हित और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने मांग की है कि नई निविदा जारी करने से पहले लंबित जांच पूरी की जाए, दोषी एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पारदर्शी तरीके से नई एजेंसी का चयन किया जाए।

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