नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी। गाजियाबाद गनौली गांव निवासी डेयरी संचालक ओमकार के चर्चित अपहरण एवं हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिन मुख्य आरोपियों की तलाश में लोनी पुलिस, गाजियाबाद क्राइम ब्रांच और कई विशेष टीमें पिछले 11 दिनों से जुटी थीं, उन्हें आखिरकार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गोपाल और सौरभ के रूप में हुई है, जिन पर उतर प्रदेश में 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
दिल्ली पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच ने घेराबंदी की। पुलिस को देखकर आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में दोनों बदमाशो के पैर में गोली लगी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में दोनों को उपचार के लिए एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गिरफ्तारी ने खड़े किए कई सवाल
गोपाल और सौरभ की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली को लेकर खड़ा हो गया है। ओमकार के अपहरण और हत्या की घटना के बाद गाजियाबाद पुलिस ने क्राइम ब्रांच समेत करीब एक दर्जन टीमों के गठन का दावा किया था, लेकिन इतने दिनों तक मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर रहे और दिल्ली पहुंच गए।
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जब उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार दबिश और तलाशी अभियान चलाने का दावा कर रही थी, तब आरोपी राज्य की सीमाएं पार कर दिल्ली तक कैसे पहुंच गए। यही कारण है कि अब पुलिस की रणनीति और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
अब भी नहीं मिला ओमकार का शव
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि घटना के खुलासे और मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद ओमकार का शव अभी तक बरामद नहीं हो सका है। पुलिस का दावा है कि हत्या के बाद शव को गंग नहर में फेंक दिया गया था। इसके बाद से गंग नहर, विभिन्न नहरों, तालाबों, झाड़ियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में लगातार तलाश अभियान चलाया जा रहा है।
बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़ और बुलंदशहर तक पुलिस की टीमें खोजबीन कर चुकी हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। समय बीतने के साथ परिजनों की बेचैनी और बढ़ती जा रही है।
परिजनों की निगाहें अगली कार्रवाई पर
ओमकार के परिवार के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी राहत से अधिक एक नई उम्मीद लेकर आई है। परिजन अब सबसे पहले ओमकार के शव की बरामदगी चाहते हैं, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। साथ ही वे यह भी जानना चाहते हैं कि हत्या के पीछे की पूरी साजिश क्या थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
गांव और क्षेत्र के लोगों की नजरें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का मानना है कि जब तक ओमकार का शव बरामद नहीं होता और पूरे घटनाक्रम की परतें नहीं खुलतीं, तब तक यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
चर्चा का केंद्र बना हत्याकांड
ओमकार हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली, जांच की दिशा और कानून-व्यवस्था पर बहस का विषय बन चुका है। दिल्ली पुलिस द्वारा मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जहां जांच को नई दिशा मिली है, वहीं लोनी और गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालों का बाजार गर्म हो गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस ओमकार का शव बरामद कर पाएगी और क्या इस चर्चित हत्याकांड की पूरी गुत्थी सुलझ सकेगी। इसका जवाब आने वाले दिनों की जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा।



