रिम्स प्रभावित परिवारों को इस्लामनगर की तर्ज पर तत्काल राहत और स्पष्ट, समयबद्ध पुनर्वास नीति के तहत स्थायी आवास उपलब्ध कराए हेमन्त सरकार- विजय शंकर नायक
Hemant government should provide immediate relief and permanent housing to RIMS affected families on the lines of Islamnagar under a clear, time-bound rehabilitation policy - Vijay Shankar Nayak

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड में विकास और प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर संवैधानिक न्याय आज कठघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। इस्लामनगर में उजड़े परिवारों को जहां प्रशासन और न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आंशिक राहत और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया, वही रिम्स परिसर के आसपास रहने वाले सैकड़ों गरीब परिवार—विशेषकर दलित, आदिवासी और मूलवासी समाज—एक ही झटके में बेघर कर दिए गये। इन परिवारों में बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं, जिन्हें ठिठुरती सर्दी में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बेसहारा छोड़ दिया गया। यह कार्रवाई समानता और मानवीय गरिमा जैसे संवैधानिक सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उपरोक्त बातें आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह- पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समान परिस्थितियों में समान व्यवहार की गारंटी देता है। इस्लामनगर के विस्थापितों को जहां आंशिक पुनर्वास मिला, वहीं रिम्स प्रभावित परिवारों की पीड़ा को अनसुना कर दिया गया। नायक ने कहा कि रांची में अतिक्रमण हटाने के दो मामले—इस्लामनगर और रिम्स परिसर—आज दिल दहला देने वाली सच्चाई उजागर करते हैं। इस्लामनगर के परिवार, जो वर्ष 2011 में उजड़े थे, उन्हें कोर्ट की मानवीय दृष्टि के आधार पर आंशिक पुनर्वास मिला। सवाल यह है कि क्या एक ही राज्य में न्याय के दो मापदंड हो सकते हैं? कानून की नजर में दोनों ही मामले अतिक्रमण के हैं, दोनों में गरीब और मेहनतकश परिवार प्रभावित हुए हैं, फिर एक को राहत और दूसरे को पूर्ण बेबसी क्यों। उन्होंने आगे कहा कि रिम्स क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों को रातों-रात उजाड़ दिया गया। कड़ाके की ठंड में बच्चे कांप रहे हैं, मांएं आंसू बहा रही हैं और बुजुर्ग बेबस निगाहों से आसमान की ओर देख रहे हैं। हाईकोर्ट ने अस्पताल सुधार को प्राथमिकता दी, लेकिन इन मासूमों की पीड़ा अनसुनी रह गई। क्या कानून की रक्षा केवल गरीबों की आहों की कीमत पर ही होगी? नायक ने झारखण्ड सरकार और माननीय उच्च न्यायालय से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा कि रिम्स विस्थापितों की पुकार को भी सुना जाए और तत्काल अस्थायी आवास, राहत तथा स्पष्ट और समयबद्ध पुनर्वास नीति के तहत स्थायी आवास की व्यवस्था की जाए। इस्लामनगर की तरह मानवीय हस्तक्षेप कर इन परिवारों के आंसू पोंछे जाए। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन गरीबों की गरीबी और बेबसी की कीमत पर नहीं। यह इंसानियत और समान न्याय का समय है, जहां सभी को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।



