अधिवक्ता डॉ अमित कुमार उठवाल की प्रेस वार्ता।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
संभल। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के रजिस्ट्रार जनरल ने दिनाक 3/6/2026 को उत्तर प्रदेश के सभी जनपद न्यायधीशों को पत्र प्रेषित कर बार एसोसिएशन के कार्य बहिष्कार पर जवाबदेही तय कर कार्यवाही करने को निर्देशित किया है जोकि आंशिक रूप से स्वागत योग्य है।
माननीय उच्च न्यायालय को एवं उत्तर प्रदेश सरकार तथा वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी संज्ञान लेना चाहिए कि राजस्व न्यायालयों के पीठासीन जोकि निरंकुश हो गए हैं उनपर भी विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाये राजस्व संहिता 2006 में प्रत्येक मामले के निस्तारण की समय सीमा तय कर रखी है लेकिन राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी अपनी हठधर्मिता पर उतारू रहते हैं नामांतरण बाद 45 दिन मैं निस्तारित होना चाहिए लेकिन दो दो माह तक दर्ज नहीं होते धारा 24,30, 31/32 आदि मैं कानूनगो स्तर से 6 से 10 माह तक रिपोर्ट संबंधित न्यायालय को प्रेषित नहीं की जाती हैं।
विवादित पत्रावलियां बहस सुनने के बाद आदेश मैं सुरक्षित रख ली जाती हैं कई कई माह तक आदेश पारित नहीं होते, समय से परवाने दर्ज नहीं होते, 90 प्रतिशत रियल टाईम खतौनी में काश्तकारों के अंश गलत हैं, खतौनी पर दर्ज आदेशों का निराज नहीं किया जाता ,इसके लिए किसी अधिकारी की कोई जवाब देही तय नहीं की गई है जोकि चिंता का विषय है उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश सरकार एवं वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान लेते हुए प्रत्येक जनपद में एक कमेटी बनाई जाये जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं को शामिल किया जाये अगर किसी राजस्व न्यायालय के किसी पीठासीन अधिकारी के व्यवहार अथवा कार्य शैली से किसी काश्तकार,अधिवक्ता अथवा किसी बार एसोसिएशन को कोई शिकायत या समस्या हो तो यह कमेटी उसपर सुनवाई कर कार्यवाही प्रस्तावित करे साथ ही यह भी व्यवस्था लागू हो कि जो कोई पीठासीन अधिकारी राजस्व संहिता में निर्धारित अधिकतम समय में मामले का निस्तारण नहीं करते हैं साथ ही जो संबंधित कर्मचारी समय से आदेश का क्रियान्वयन नहीं कर्ता है उक्त अधिकारी/कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाए, जिसमे काश्तकार को सस्ता एवं सुलभ न्याय मिल सके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति लागू हो सके।



