सिंगरौली

 शिव मंदिर मजौना के धर्मशाला में सरपंच के करीबी ने बना दिया सीमेंट की गोदाम, कलेक्टर से हुई शिकायत 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। देवसर क्षेत्र के मजौना पंचायत स्थित प्राचीन शिव मंदिर के नाम से बने धर्मशाला में इन दिनों गांव के ही एक व्यक्ति ने सीमेंट की गोदाम बना डाला है यह हम नहीं कह रहे बल्कि ग्राम वासियों ने यह गंभीर आरोप लगाते हुए देवसर एसडीएम से शिकायत की है बताया जाता है कि मजौना प्राचीन शिव मंदिर जो कि लगभग बहुत पुरानी और प्रकृति के सौंदर्य से भरपूर मजौना नाथ मंदिर का स्थान है। पुरानी मंदिर को ध्वस्त कर नई मंदिर का निर्माण किया गया, ग्रामीणों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम विकास सिंह ने इस मंदिर के निर्माण में विशेष रुचि दिखाई थी, बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण कार्य गांव के ही गोमती पाठक ने ठेका लेकर शुरू किया था जब तक एसडीएम थे तब तक मंदिर का कार्य चला और एसडीएम का ट्रांसफर होते ही मंदिर का निर्माण कार्य बंद कर दिया गया गया आज भी मंदिर का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है यही नही आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जो भी मंदिर, निर्माण का सामान सीमेंट सरिया वगैरह बचा हुआ था उसे भी उठा ले गये। 

धर्मशाला में अवैध कब्जा

मजौना ग्राम वासियों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के सामने मंदिर के ही नाम से बने धर्मशाला में गांव के ही गोमती पाठक ने सीमेंट का गोदाम बना रखा है जबकि ग्रामीणों के अनुसार यह बहुत ही महत्वपूर्ण धर्मशाला पूर्व विधायक कमलेश्वर पटेल के सहयोग से बना था लेकिन यह धर्मशाला बनते ही अवैध कब्जे का शिकार हो गया लगभग ढाई वर्ष से उसमें सीमेंट लोहा रखा हुआ है जबकि वह धर्मशाला धार्मिक आयोजनों के लिए दूर दराज से आए हुए साधु संतों को ठहरने और विश्राम करने के लिए बनवाया गया था लेकिन उसमे अवैध रूप से कब्जा कर ताला लगा दिया गया है। 

तालाब नवीनीकरण मे भी गोलमाल

बताते हैं कि मंदिर के पास प्राचीन तालाब है जिसका जीर्णोद्धार कई बार कराया गया लेकिन तालाब की स्थिति जस की तस्वीर बनी हुई है अभी वर्तमान में भी तालाब मे कार्य, चल रहा है लेकिन आरोप है कि सीढ़ी कई बार बनाई गई और गुणवत्ता विहीन कार्यों की वजह से वह कई बार ध्वस्त हो चुकी है पर बार बार उन्हीं के ऊपर थोड़ी सी बजरी और सीमेंट का लेप लगा कर नवीनीकरण कर दिया जाता है और सरकार के खजाने का दुरुपयोग किया जाता है सीढ़ीयां ऐसी बनाई गई हैं कि वहां के निकलने वाला पानी का स्रोत तक बंद कर दिया गया है अगर जल स्रोत ही बंद हो जाएगा तो फिर मंदिर का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा , ग्रामीणों ने कहा है कि हम लोगों ने इसकी शिकायत कई बार किये लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

शौचालय निर्माण में भी धांधली

ग्राम वासियों ने बताया कि मंदिर परिसर के नाम से चार से पांच लाख रुपए की लागत से बने शौचालय में भी जमकर धांधली की गई है। शौचालय का निर्माण इस तरह से किया गया है कि शौचालय पूरी तरह से अनुपयोगी पड़ा हुआ है और वहां गंदगी का भंडार है।

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