गाजियाबाद
लोनी प्रेमनगर में पार्क की भूमि पर अवैध निर्माण
RWA ने की शिकायत जिलाधिकारी ने GDA व SDM को कार्रवाई के आदेश दिए

लोनी। प्रेमनगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने जिलाधिकारी गाज़ियाबाद से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि प्रेमनगर औद्योगिक क्षेत्र में पार्क के लिए आरक्षित भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और उपजिलाधिकारी लोनी को मामले में शीघ्र कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
RWA प्रेम नगर के अध्यक्ष राशिद अल्वी वारसी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने पार्क हेतु 10,000 वर्गमीटर भूमि को हरा क्षेत्र घोषित करते हुए खाली छोडा था, लेकिन आज तक भी उस खाली भूमि पर कोई विकास कार्य गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा शुरू नहीं कराया गया। आरोप है कि नोएडा के एक बिल्डर ने इस भूमि पर दीवार खड़ी करके अवैध रुप से कब्ज़ा कर लिया है और सड़क मार्ग तक को अवरुद्ध कर दिया है।
वारसी ने जिलाधिकारी गाजियाबाद को दिए अपने पत्र में बताया कि इस मामले में कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन न तो दस्तावेज़ों की जांच हुई और न ही कब्जाधारकों को इस मामले में नोटिस जारी किये गये। उन्होंने मांग की है कि पार्क की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर शीघ्र पार्क का विकास कराया जाए ताकि क्षेत्रवासियों को खुला और हरा-भरा पार्क मिल सके।
RWA ने पत्र में क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण स्तर पर चिंता जताई और कहा कि पार्क का विकास लंबित रहने से प्रेमनगर क्षेत्र का वायु प्रदूषण रेड जोन में पहुंच चुका है, जो गंभीर स्वास्थ्य खतरे की स्थिति है। संगठन ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश दिनांक 7 नवंबर 2024 का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन को तत्काल कब्जा हटाकर सौंदर्यीकरण व वर्षा रोपण का कार्य पूरा कराना चाहिए।
इसके अलावा, सड़क की भूमि पर कब्जा करने वाले रतिराम जैन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई है। 26 अगस्त 2025 को आयोजित जनसुनवाई में पर्यावरण कार्यकर्ता फैज अली वारसी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए GDA को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र संख्या 293 (दिनांक 6 सितंबर 2025) में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित याचिका (वार्ड संख्या 1803/2024 से सम्बन्धित है
और न्यायलय द्वारा पारित आदेशों का अनुपालन करना अनिवार्य है जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आदेशों का पालन न करने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है


