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आतंकवाद के खिलाफ सरहद की महिलाओं ने उठाई बंदूक, आतंकियों के लिए बनीं चुनौती

जम्मू । सैकड़ों महिला वीडीजी सदस्यों ने डोडा, किश्तवाड़ और रामबन के गांवों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी बहादुरी साबित की और सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं।
डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में सैकड़ों महिला विलिज डिफेंस गार्ड (वीडीजी) सदस्यों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी क्षमता साबित कर रही। 1990 के दशक की शुरूआत से इन जिलों में आतंकवाद का मुकाबला करने वाली ये महिलाएं अपने गांवों की सुरक्षा का भरोसेमंद स्तंभ बन गई हैं।
एसपी भद्रवाह विनोद शर्मा ने बताया कि कठोर सर्दियों के दौरान कई पुरुष सदस्य अपनी आजीविका कमाने के लिए उत्तराखंड, दिल्ली और मुंबई जैसे अन्य राज्यों में चले जाते हैं। इस दौरान कई गांवों में बुजुर्गों को छोड़कर कोई पुरुष सदस्य नहीं रहता, जिससे ये क्षेत्र आतंकवादी गतिविधियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं।
इन गांवों को सुरक्षित रखने के लिए महिला वीडीजी सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है। ये महिलाएं देश की सुरक्षा के लिए उतनी ही चिंतित हैं जितनी उनके पुरुष साथी। हम उन्हें आतंकवादियों से लड़ने की रणनीति और तरीके सिखाते हैं और उन्होंने खुद को साबित किया है। अब तक हमें इन बहादुर महिलाओं से बेहतरीन परिणाम मिले हैं।
वीडीजी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से अब दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है और आतंकवादियों के लिए इन गांवों में सेंध लगाना मुश्किल हो गया है।

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