
पटना । जो हर वीआईपी मूवमेंट पर बिहार में होता है, वही हुआ। ‘अमर उजाला’ ने नालंदा के मंदिर में हुई भगदड़ की पहली खबर में ही सामने ला दिया था कि पूरा अमला राष्ट्रपति के दौरे की तैयारी में था। वही अब भगदड़ में जिंदा बचे लोगों ने बताया।
कोय इंतजाम नहीं था। कोय पुलिस नहीं था। कोय देखे वाला नहीं था। एक बार कोय हल्ला किया और सब भागे लगा। कोन किसपर चढ़ा, कोन किसको कुचला… केकरो पता नै चला। कुले भीड़ हटा तो अंदर से लाश और खून देख दहल गए।- नालंदा के बिहारशरीफ में मघड़ा देवी शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ के बाद बचे लोगों की भीड़ से यह प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसी प्रतिक्रियाएं, जिनमें दर्द था। भय था। और, गुस्सा भी। गुस्सा इस बात से भी कि जब सब खत्म हो गया तो पुलिस भी आ गई, देखने वाले भी आ गए। वीडियो बनाने वाले भी।
अचानक भगदड़ मच गया, और…-भगदड़ में घायल हुई रीता देवी ने रोते हुए कहा कि हमलोग चारों सहेली मंदिर आए थे। अचानक भगदड़ मच गया। मेरी एक सहेली जमीन पर गिर गई। जब तक हमलोग कुछ समझ पाते तब तक लोग उसके ऊपर चढ़कर इधर उधर भागने लगे। दबने से उसकी मौत हो गई। हमलोगों का सबकुछ खत्म हो गया। वहीं सोनम कुमारी ने कहा कि मैं अपनी मां के साथ मंदिर दर्शन करने आई थी। भीड़ काफी थी। हमलोग काफी देर से कतार में लगे थे। मां आगे चली गई। मैं उन्हें मना कर रही थी कि ‘आगे मत जाओ मम्मी’। लेकिन, मां ने मेरी नहीं सुनी। इसी बीच भगदड़ मचने के कारण मां की जान चली गई।
महिलाओं ने किस पर लगाया आरोप?-महिलाओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रत्यक्षदर्शी रीना राय ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। इतनी भीड़ होने के बावजूद कोई देखने वाला नहीं था। पुलिस बल नहीं थे। पहले दर्शन करने के चक्कर में लोगों आगे बढ़ने लगे। प्रशासन लोगों की भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पाई। इसलिए यह हादसा हुआ।
‘पैसा लेकर भी अंदर घुसाया जा रहा था’-मंदिर में दर्शन करने पहुंचे पंकज कुमार ने कहा कि हमलोग ढाई घंटे से लाइन में खड़े थे। मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे ही लाइन में लगा था। मंदिर प्रबंधन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं थी। जिला प्रशासन की ओर से खास इंतजाम नहीं था। 50 मीटर लंबी लाइन में खड़े लोगों को दर्शन करने में दो घंटा लग रहा था। गर्मी के कारण लोगों का हाल खराब हो रहा था। पंकज कुमार ने आरोप लगाया कि पैसा लेकर भी लोगों को गर्भगृह में घुसाया जा रहा था। हमलोगों ने पैसा नहीं दिया तो लाइन में लगे रह गए। इसी बीच अचानक भगदड़ मच गई। लोग इधर उधर भागने लगे। मैं भी जमीन पर गिर गया। मेरे ऊपर कम से कम 10 से 15 लोग गिरे होंगे।
बिहार में वीआईपी मूवमेंट जहां, पुलिस वहीं-बिहार में ऐसा कभी भी हो सकता है, खासकर जब किसी बड़े वीआईपी का मूवमेंट हो। राष्ट्रपति का नालंदा दौरा था तो पुलिस-प्रशासन की पूरी टीम उसी जगह पर केंद्रित थी। उसी रूट पर जहां से राष्ट्रपति को गुजरना था। किसी का इस मंदिर या ऐसे किसी कार्यक्रम की ओर ध्यान नहीं था। नतीजा, यह दर्द जो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया। मंदिर भगदड़ में जिंदा बचे लोगों ने बताया कि कैसे किसी एक समूह से उठे शोरगुल की वजह समझे बगैर लोग भागदौड़ करने लगे। पुलिस रहती तो संभालने का प्रयास करती, लेकिन वह नहीं थी। कोई प्रशासनिक इंतजाम नहीं था, जिसके कारण भीड़ असामान्य तरीके से भागदौड़ करने लगी। जो गिरा, उसपर चढ़ते हुए लोग निकलने लगे। चूंकि ज्यादातर खाली पेट थे, इसलिए नहीं उठ पाने वालों को देखने के लिए कोई रुकने को तैयार नहीं था। कमजोर महिलाएं गिरीं और भीड़ उन्हें कुचलती चली गई। बाद में जब भीड़ छंटी तो खून से लथपथ शव निकलने लगे।



