नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य इन दिनों दिलचस्प मोड़ पर है, जहां एक ओर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अपनी ही कमजोरियों के चलते पिछड़ता नजर आ रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है।
कभी लोनी में मजबूत जनाधार रखने वाला रालोद आज कार्यकताओं की निष्क्रियता का शिकार दिख रहा है। पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की जनता से दूरी इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। जनहित के मुद्दों पर पार्टी की आवाज लगभग पूरी तरह से गायब है। पिछले एक वर्ष में कोई बड़ा आंदोलन या जनसंपर्क अभियान सामने नहीं आया, जिस कारण संगठन की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस स्थिति के पीछे एक बड़ा कारण लोनी नगर पालिका की चेयरमैन रंजीता धामा की भूमिका को भी माना जा रहा है। नगरपालिका चुनाव जीतने के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने, बैठकों के आयोजन और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने जैसे प्रयास न के बराबर रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि रालोद का ढांचा कागजों तक सीमित होता जा रहा है। इसके अलावा नगर क्षेत्र में राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारियों को अधिकांश वोटर जानते तक नहीं है
हालांकि रंजीता धामा चेयरमैन पद पर काबिज हैं और खतौली विधायक मदन भैया भी इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं जिनका क्षेत्र में विशेष प्रभाव माना जाता है, इसके अलावा मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग भी रालोद से जुड़ा रहा है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी का जमीनी जुड़ाव कमजोर पड़ता जा रहा है। कई कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे कारण पार्टी के कौर वोटरों में असंतोष भी बढ़ रहा है।
रालोद की संगठनात्मक कमजोरी खासकर महिला मोर्चे में साफ दिखाई देती है। महिला चेयरमैन होने के बावजूद महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए कोई प्रभावी अभियान लोनी क्षेत्र में नहीं चलाया गया, जिससे महिला वर्ग में पार्टी की पकड़ लगातार कमजोर बनी हुई है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा ने अपनी रणनीति को आक्रामक रूप से लागू करते हुए संगठन को नई ऊर्जा दी है। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनके नेतृत्व में कार्यकर्ता नियमित कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच पहुंच बना रहे हैं। भाजपा का यह सतत जनसंपर्क अभियान उसे जमीनी स्तर पर मजबूत कर रहा है।
भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष आरती मिश्रा भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रही हैं। वे महिला टीमों के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान चला रही हैं, जिससे पार्टी का आधार और विस्तारित हो रहा है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो जहां रालोद का संगठन लोनी में कमजोर और निष्क्रिय नजर आता है, वहीं भाजपा लगातार अपनी जड़ें मजबूत कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली से सटे इस क्षेत्र में रालोद की स्थिति दिल्ली के कई इलाकों जैसे रोहताश नगर, बाबरपुर, मौजपुर और छज्जूपुर में पदाधिकारियों कि मेहनत के चलते मजबूत हो रही है तो लोनी में पदाधिकारियों की अनिष्क्रियता के चलते कमजोर बताई जा रही है, जहां कार्यकर्ता सक्रिय रूप से संगठन को मजबूत करने की बजाए पदों पर काबिज होकर बैठ गये है
कुल मिलाकर लोनी में रालोद की निष्क्रियता और भाजपा की सक्रियता के बीच का अंतर ही मौजूदा राजनीतिक समीकरण तय कर रहा है। यदि रालोद ने समय रहते संगठनात्मक बदलाव नहीं किए, तो आने वाले समय में उसका जनाधार और सिमट सकता है।



