बोकारो

अगर हम जाति, लिंग और राजनीति में उलझे रहे, तो प्रकृति का विनाश तय है: बबलू आनंद महतो”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बोकारो। समाज आज असली मुद्दों को छोड़कर जाति, लिंग और राजनीति के बँटवारे में उलझ गया है, जबकि हमारे अस्तित्व का आधार प्रकृति लगातार विनाश की ओर बढ़ रही है। ये बातें ‘प्राकृतिक रक्षण’ के संस्थापक और प्रखर पर्यावरण कार्यकर्ता बबलू आनंद महतो ने पर्यावरण और स्वास्थ्य के गिरते स्तर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज का ध्यान आपसी मतभेदों और राजनीतिक चर्चाओं पर अधिक है, जबकि पर्यावरण जैसे जरूरी विषय को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कल पर्यावरण ही नहीं बचेगा, तो इंसान कैसे बचेगा, और जब इंसान ही नहीं रहेगा, तो इन बँटवारों का क्या अर्थ रह जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि इसके उदाहरण आज जमीन पर साफ दिख रहे हैं। कई इलाकों में लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। शहरों में लोग साफ हवा के लिए मास्क पहनने को मजबूर हैं। गर्मी हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है, और अस्पतालों में सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह सब केवल खबर नहीं, बल्कि चेतावनी है। हम छोटी-छोटी लापरवाहियों से बड़े नुकसान की ओर बढ़ रहे हैं—कचरा इधर-उधर फेंकना, पानी की बर्बादी करना और पेड़ों को नजरअंदाज करना आज आम बात बन चुकी है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रकृति अब संकेत नहीं, बल्कि अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर चुकी है। यदि समय रहते इंसान नहीं संभला, तो आने वाला समय और भी कठिन हो सकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है—कई प्रजातियां समय के साथ समाप्त हो चुकी हैं, और यदि हमने अभी भी नहीं सीखा, तो मानव समाज भी गंभीर संकट में पड़ सकता है।
अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे खुद से सवाल करें—क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य छोड़ रहे हैं? उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और पर्यावरण को सबसे ऊपर रखे।
“पहले प्रकृति, तभी जीवन”—इसी सोच के साथ आगे बढ़ना ही समाधान है।

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