अंतरराष्ट्रीय

होर्मुज में फिर बिगड़े हालात

ईरानी सेना ने तीन जहाजों पर की गोलीबारी, शांति वार्ता को लेकर अब भी संशय बरकरार

तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। यह हमला राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर बढ़ाने के ऐलान के बावजूद हुआ, क्योंकि अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी खत्म नहीं की है। इस तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 98 डॉलर के पार पहुंच गई हैं।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता को लेकर प्रयास किए जा रहे थे।
आखिर ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया?
ईरान की अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने बुधवार सुबह इस दुस्साहसी कार्रवाई को अंजाम दिया। खबरों के मुताबिक, ईरानी सेना ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलियां चलाईं और उसके कुछ ही देर बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने सेना की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था, इसलिए उन पर कानूनी रूप से कार्रवाई की गई। पकड़े गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है, जिन्हें ईरानी सेना अपने साथ ले गई है। इसके कुछ देर बाद एक तीसरे जहाज यूफोरिया पर भी हमला किया गया, जिसके ईरानी तट पर फंसे होने की खबर है।
ट्रंप का संघर्षविराम का फैसला काम नहीं आया?
यह हमला उस वक्त हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को खत्म होने वाले संघर्षविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था। ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि इससे बातचीत का रास्ता खुलेगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान इसी बात से नाराज है। ईरान के कूटनीतिज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक वे किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए मेज पर नहीं आएंगे। यानी सीजफायर होने के बावजूद समुद्र में छिड़ी यह जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
समुद्री जंग का क्या असर कितना?
होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (बेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने या महंगी होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की ढुलाई भी महंगी हो गई है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा या यहां हमले जारी रहे, तो वैश्विक मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा और आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।
पाकिस्तान और अन्य देशों की स्थिति क्या?
शांति की कोशिशों के बीच पाकिस्तान के अधिकारी अभी भी ईरान की तरफ से किसी सकारात्मक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। इस्लामाबाद अगले दौर की वार्ता की मेजबानी करना चाहता है, लेकिन ईरान ने अब तक अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि नहीं की है। मिस्र में मौजूद ईरानी राजनयिक मुजतबा फिरदौसी पोर ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी खत्म नहीं करता, तब तक कोई भी ईरानी दल पाकिस्तान नहीं जाएगा। इससे साफ है कि कूटनीति इस वक्त पूरी तरह ठप पड़ी है और हथियारों की होड़ बढ़ती जा रही है।
युद्ध में अब तक कितना नुकसान हुआ?
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों से शुरू हुए इस युद्ध ने अब तक हजारों लोगों की बलि ले ली है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में अब तक कम से कम 3,375 लोग मारे जा चुके हैं। लेबनान में भी स्थिति भयावह है, जहां 2,290 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस्राइल में 23 नागरिक और लेबनान में लड़ रहे 15 सैनिक मारे गए हैं। वहीं, खाड़ी देशों में भी एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। क्षेत्र में तैनात 13 अमेरिकी सैनिकों ने भी इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई है।

ईरान के तेवर फिलहाल नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने धमकी दी है कि वे दुश्मन की कल्पना से परे जाकर करारा प्रहार करेंगे। ईरान में कट्टरपंथी समर्थक रैलियां निकाल रहे हैं और अपनी मिसाइल ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच भी संघर्ष जारी है। हालांकि वहां 10 दिनों का सीजफायर लागू है, लेकिन दोनों तरफ से दावों और जवाबी हमलों ने इसे कमजोर कर दिया है। जब तक कोई ठोस कूटनीतिक समझौता नहीं होता, तब तक समुद्र से लेकर जमीन तक मौत का यह खेल जारी रहने की आशंका है।

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