जालौन

नवजात शिशु मौत मामले में पांच स्वास्थ्य कर्मियों पर मुकदमे का संज्ञान

 अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट की खारिज

12 जून 2026 को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किए
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
माधौगढ़ (जालौन)। न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौन की अदालत ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माधौगढ़ में कथित चिकित्सकीय लापरवाही से नवजात शिशु की मौत के मामले में बड़ा आदेश जारी करते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) खारिज कर दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर पांच स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत संज्ञान लेते हुए समन जारी करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला अपराध संख्या-41/2024 से संबंधित है, जिसमें संदेश सिंह निवासी अकवरपुरा ने आरोप लगाया था कि उनकी बहू के प्रसव के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माधौगढ़ में तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई। यह एफआईआर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौन द्वारा धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दिए गए आदेश के बाद दर्ज की गई थी। मुंसिफ न्यायालय जालौन में वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष सिंह यादव ने बताया कि शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रसव के दौरान बार-बार अनुरोध करने के बावजूद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं दी गई, डॉक्टरों को तत्काल नहीं बुलाया गया तथा प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल में गंभीर लापरवाही बरती गई। इसके चलते नवजात को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई। जांच के बाद पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि बच्चे की मौत गर्भनाल के गले में फंसने की जटिलता के कारण हुई तथा किसी भी आरोपी की ओर से आपराधिक लापरवाही सिद्ध नहीं होती। इस रिपोर्ट के विरोध में शिकायतकर्ता ने अदालत में विरोध याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल बोर्ड की राय तथा अन्य दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से नवजात की मौत का कारण “सिर में चोट” बताया गया है। रिपोर्ट में सिर पर सेफामेनालोमा, सबड्यूरल हेमरेज जैसी गंभीर चोटों का उल्लेख भी किया गया, जिन्हें मृत्यु से पूर्व की चोटें माना गया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पोस्टमार्टम में बच्चे के पेट में दूध और आंशिक रूप से पचे पदार्थ मिलने से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि बच्चा जीवित पैदा हुआ था। वहीं अभियोजन पक्ष के संयुक्त निदेशक की रिपोर्ट में भी पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा गया था कि शिशु को गलत तरीके से मृत शिशु मान लिया गया, जबकि उपलब्ध साक्ष्य चिकित्सा लापरवाही की ओर संकेत करते हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट जालौन ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और मामले की न्यायिक जांच आवश्यक है। अदालत ने नर्स संगीता, नर्स आकांक्षा, डॉ. पूजा राजपूत, डॉ. कुलदीप राजपूत और नर्स मिथिलेश के खिलाफ धारा 304ए आईपीसी के तहत संज्ञान लेते हुए 12 जून 2026 को अदालत में उपस्थित होने के लिए समन जारी किए हैं।
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