गाजियाबाद

लोनी नगरपालिका का नया कारनामा 

रैम्प की मांग, जांच अधिकारी ने बना दिया अतिक्रमण 

लोनी नगरपालिका में बिना देखे जांच, बिना सुने निस्तारण और घर बैठे न्याय का अद्भुत प्रयोग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश सरकार चाहे जितने दावे कर ले कि आईजीआरएस पोर्टल जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहा है, लेकिन लोनी नगरपालिका के कुछ अधिकारी इस व्यवस्था को “कल्पना शक्ति आधारित जांच प्रणाली” बनाने पर उतारू दिखाई दे रहे हैं। यहां शिकायत कुछ और होती है और निस्तारण किसी और विषय का कर दिया जाता है।
मामला नगरपालिका परिषद लोनी के वार्ड संख्या 55 का है, जहां  फरमान अली पुत्र अहसान अली ने मुख्य मार्ग बनने के बाद उससे जुड़ी छोटी गलियों में उतरने के लिए रैम्प बनवाने की मांग करते हुए आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40014026029599 दर्ज कराई थी।
शिकायत की जांच अधिशासी अधिकारी द्वारा अवर अभियंता श्रीमती नीलम को सौंपी गई। अब यहीं से सरकारी जांच की ऐसी कहानी शुरू हुई जिसे पढ़कर अच्छे-अच्छे पटकथा लेखक भी बेरोजगार हो जाएं।
शिकायत में गलियों में उतरने के लिए रैम्प की मांग थी, लेकिन जांच अधिकारी ने अपने अलौकिक प्रशासनिक ज्ञान से उसे अतिक्रमण का मामला बना दिया। यानी जिसने सुविधा मांगी, वही फाइलों में आरोपी बन बैठा।
हैरानी की बात यह है कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि अवर अभियंता महोदया ने न तो मौके का निरीक्षण किया और न ही शिकायतकर्ता से बातचीत की, लेकिन रिपोर्ट ऐसी तैयार कर दी मानो ड्रोन कैमरे से पूरा इलाका खंगाल लिया हो। जिलाधिकारी गाजियाबाद को भेजी गई रिपोर्ट में बाकायदा यह लिख दिया गया कि संबंधित अतिक्रमण करने वाले के खिलाफ नगरपालिका अधिनियम 1916 के तहत कार्रवाई की जा रही है और शिकायतकर्ता को भी अवगत करा दिया गया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत “रैम्प बनवाने” की थी तो जांच “रैम्प हटवाने” की कैसे हो गई? क्या आईजीआरएस पोर्टल पर अब शिकायतें भी सरकारी सुविधा अनुसार “रीराइट” की जा रही हैं?
प्रदेश सरकार बार-बार निर्देश देती है कि आईजीआरएस शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और मौके पर जाकर निस्तारण किया जाए। शासनादेशों में साफ उल्लेख है कि गलत आख्या लगाने, भ्रामक रिपोर्ट भेजने और बिना जांच निस्तारण करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन लोनी नगरपालिका में शायद नया नियम लागू है
पहले निस्तारण करो, बाद में देखो शिकायत थी क्या।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में नाली की शिकायत पर हत्या का मुकदमा और स्ट्रीट लाइट की शिकायत पर देशद्रोह की रिपोर्ट लगना भी कोई बड़ी बात नहीं होगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि शासन ऐसे घर बैठे जांच विशेषज्ञों पर कार्रवाई करता है या फिर आईजीआरएस पोर्टल जनता के लिए सिर्फ शिकायत दर्ज करने का डिजिटल मनोरंजन केंद्र बनकर रह जाएगा।
फिलहाल क्षेत्र में चर्चा यही है
लोनी नगरपालिका में शिकायत नहीं, किस्मत दर्ज कराइए… क्योंकि निस्तारण क्या होगा, यह अफसरों की कल्पना पर निर्भर है!”
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