कैराना

जहरीले धुएं के खिलाफ फूटा जनाक्रोश

टायर फैक्ट्री के गेट पर ग्रामीणों का हल्लाबोल, बंद कराने की मांग

एक साल से प्रदूषण झेल रहे ममौर-सहपत के लोग, कार्रवाई न होने पर धरना-प्रदर्शन,फसलों पर राख की मार, सांस और एलर्जी के मरीज बढ़ने का दावा; प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर भी उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। ममौर स्थित टायर फैक्ट्री से फैल रहे कथित प्रदूषण के विरोध में शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्राम ममौर और सहपत के दर्जनों ग्रामीण फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन करते हुए फैक्ट्री को बंद कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और राख के कारण क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले करीब एक वर्ष से इस समस्या के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ममौर स्थित एसआर प्रोसेस नामक टायर फैक्ट्री की चिमनियों से निकलने वाला धुआं और राख आसपास के गांवों तक पहुंच रही है। इसके कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। वहीं किसानों ने भी फैक्ट्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि चिमनियों से निकलने वाली राख खेतों में खड़ी फसलों पर जम रही है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खेती-किसानी पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि यदि संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई करता तो उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक फैक्ट्री के संचालन पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि एक वर्ष से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उनका कहना है कि निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
 दो फैक्ट्रियों के बीच घुट रही जिंदगी
ग्रामीणों का कहना है कि ममौर और सहपत क्षेत्र के लोग इस समय शुद्ध हवा के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्र में संचालित दो टायर फैक्ट्रियों के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि सांस, एलर्जी और अन्य बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर एसडीएम कैराना तक शिकायतें भेजी गईं, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।
एनसीआर क्षेत्र में फैक्ट्री संचालन पर भी सवाल
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में प्रदूषण संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो संबंधित विभागों ने समय रहते इसकी गंभीरता को क्यों नहीं समझा। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।बड़ा  सवाल यह है कि जब ग्रामीण पिछले एक वर्ष से प्रदूषण की शिकायतें कर रहे हैं तो आखिर संबंधित विभागों ने अब तक क्या कदम उठाए? यदि सब कुछ मानकों के अनुरूप है तो लोगों में इतना आक्रोश क्यों है? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद ही सामने आयेगा।
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