बरेली

रिद्धिमा में सामाजिक चेतना से ओतप्रोत नाटक “साँच” का मंचन 

समाज की संवेदनहीनता, सत्ता और व्यवस्था के दुरुपयोग बढ़ा रहा महिलाओं के प्रति अपराध                                   

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार (31 मई 2026) को डॉ. प्रभाकर गुप्ता और अश्वनी कुमार लिखित नाटक साँच का मंचन हुआ। विनायक कुमार श्रीवास्तव निर्देशित इस नाटक में आज के समाज में बढ़ती संवेदनहीनता, महिलाओं के प्रति अपराध, सत्ता और व्यवस्था के दुरुपयोग तथा सच बोलने के साहस जैसे गंभीर विषय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कहानी शुरू होती है ट्रेन बैठी लड़की सोनिया के साथ, जो नौकरी पेशा है और ट्रेन से ही आना जाना करती है। ट्रेन में कुछ गुंडे विक्की, रोहित और नयन चढ़ते हैं और सोनिया को परेशान करते हैं, छेड़ते हैं। सोनिया विरोध करती है लेकिन ये गुंडे नहीं मानते है। उसी ट्रेन एक लड़का आर्यन उन गुंडों का विरोध करता है। वो तीनों आर्यन के साथ मारपीट करते हैं और ऊसे चलती ट्रेन से फेंक देते हैं। ट्रेन से गिरने से आर्यन की मृत्यु हो जाती है। सोनिया पुलिस को बुलाती है। इंस्पेक्टर तीनों गुंडों को पकड़ लेते हैं , लेकिन उसमें से एक लड़का विक्की स्थानीय विधायक वर्मा का भतीजा है। थाने में इंस्पेक्टर विजय सोनिया के मंगेतर अभिषेक को बुलाता है और उसकी बात विधायक वर्मा से करवाता है। विधायक वर्मा अभिषेक को धमकाता है कि वो अपनी मंगेतर सोनिया से बयान बदलवाये और ये कहे कि जो लड़का ट्रेन फेंका गया है,  उसने ही सोनिया को छेड़ा था। विक्की नयन और रोहित तो उस लड़के को रोक रहे थे, इसी में अचानक पैर फिसलने से वो ट्रेन से गिर गया और मर गया। विधायक कहता है कि बच्चे हैं गलती हो जाती है। वो धमकी देता है कि सोनिया ने बयान नहीं बदला तो वो सोनिया, उसकी मां और अभिषेक को भी मार देगा। अभिषेक सोनिया के घर जाकर उसे लड़कों के खिलाफ कोई भी बयान न देने को कहता है। लेकिन सोनिया झूठ बोलने से मना करती है। सोनिया की मां और अभिषेक के समझने पर मान जाती है। एक दिन उसकी अंर्तआत्मा को एक साया दिखता है, वो साया आर्यन का है, वो सोनिया से कहता है कि वो उस दिन नहीं मरा था वो आज मरा है, क्योंकि तुमने जो पुलिस को बयान दिया है बिल्कुल ही उल्टा है, जबकि उन गुंडों ने तुम्हे छेड़ा और मुझे मार दिया। तब सोनिया कहती वो कोर्ट में सही बयान देगी और उन गुंडों सजा दिलवाएगी। तुम डरना मत, सच बोलना कहता हुआ गायब हो जाता है। कोर्ट में जिरह के दौरान सोनिया सच बोलती है और उन तीनों विक्की, रोहित और नयन को दोषी मानते हुए सजा सुनते हैं। वहीं विधायक वर्मा और इंस्पेक्टर पर अनावश्यक रूप से सोनिया और अभिषेक पर दबाव बनाने के लिए मुकदमा चलने का आदेश देते हैं। नाटक में संगीत संयोजन की जिम्मेदारी वायलिन वादक सूर्यकान्त चौधरी ने संभाली। गायन गुरु प्रियंका ग्वाल और  सात्त्विक मिश्रा के साथ इंस्ट्रूमेंट गुरु अमर नाथ (तबला), डेरिक अमन जेम्स (कीबोर्ड), विशेष कुमार (म्यूजिक मिक्सर), विष्णु यादव (रिकॉर्डेड संगीत ऑपरेट) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अरुण सैनी और जफर साउंड का संचालन एवं  जसवंत सिंह ने प्रकाश संचालन ने किया। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, देविशा मूर्ति, उषा गुप्ता, डा. रजनी अग्रवाल, सुभाष मेहरा, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. आशीष कुमार, डा. रीता शर्मा एवं शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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