ललितपुर
सुरों की सादगी और मधुरता की मिसाल थीं सुमन कल्याणपुर : सिद्धार्थ शर्मा
महान पाश्र्व गायिका के निधन पर जताया शोक कहा- भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम अध्याय का हुआ अवसान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। हिंदी फिल्म संगीत जगत की सुप्रसिद्ध पाश्र्व गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन पर स्तंभकार एवं साहित्य प्रेमी सिद्धार्थ शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन के साथ भारतीय फिल्म संगीत का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, जिसने अपनी मधुरता, शालीनता और भावपूर्ण गायकी से करोड़ों श्रोताओं के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि सुमन कल्याणपुर ने अपने लंबे संगीत सफर में सात सौ से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी और हिंदी सिनेमा को एक अमूल्य धरोहर प्रदान की। उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने अपने समय में थे। उन्होंने कहा कि साठ और सत्तर का दशक हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्णिम काल माना जाता है। उस दौर में लता मंगेशकर और आशा भोंसले जैसी महान गायिकाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन सुमन कल्याणपुर ने अपनी मधुर, कोमल और भावपूर्ण आवाज के बल पर श्रोताओं के दिलों में विशिष्ट स्थान बनाया। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि सुमन कल्याणपुर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज की सहजता और आत्मीयता थी। उनकी गायकी में ऐसी सादगी और मिठास थी, जो सीधे श्रोताओं के मन को स्पर्श करती थी। उनकी आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती रही, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान कायम की और अनेक कालजयी गीतों के माध्यम से संगीत जगत में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि सुमन कल्याणपुर द्वारा गाए गए अनेक गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। इनमें न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें, आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है, नन्हीं सी परी मेरी लाड़ली, तुमने पुकारा और हम चले आए, मेरा प्यार भी तू है, ये बहार भी तू है तथा जिंदगी इम्तिहान लेती है जैसे गीत शामिल हैं। इन गीतों में प्रेम, विरह, ममता, रिश्तों की संवेदनाएं और जीवन के विविध भावों का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि सुमन कल्याणपुर ने कभी लोकप्रियता की चकाचौंध को अपने व्यक्तित्व पर हावी नहीं होने दिया। वे अत्यंत विनम्र, शांत और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाली कलाकार थीं। उन्होंने संगीत को केवल पेशा नहीं, बल्कि साधना के रूप में अपनाया। यही कारण है कि उनकी गायकी में बनावट नहीं, बल्कि आत्मा की सच्ची अभिव्यक्ति सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि सुमन कल्याणपुर का निधन केवल एक महान गायिका का निधन नहीं है, बल्कि उस दौर की स्मृतियों का भी विदा होना है, जब गीत शब्दों, सुरों और भावनाओं का सुंदर संगम हुआ करते थे। हालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी आवाज आने वाली पीढय़िों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे। अंत में सिद्धार्थ शर्मा ने सुमन कल्याणपुर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संगीत जगत में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा और उनकी मधुर आवाज अमर रहेगी।



