फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में कैफे संचालक गिरफ्तार, ग्रामीणों से 2 हजार से 10 हजार रुपये तक की ठगी का आरोप
Cyber cafe operator arrested for issuing fake birth certificates; accused of swindling villagers of amounts ranging from ₹2,000 to ₹10,000.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ सदर प्रखंड के नरोत्तमपुर पंचायत अंतर्गत रामचंद्रपुर पहाड़िया टोला में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में ग्रामीणों ने एक कैफे संचालक को पकड़कर मुफ्फसिल थाना पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के बाद क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने आरोपी पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर लोगों से हजारों रुपये की अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, कैफे संचालक लंबे समय से इलाके के लोगों को जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का झांसा देकर उनसे 2 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की राशि वसूल रहा था। लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके दस्तावेज सरकारी प्रक्रिया के तहत तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि हाल ही में कुछ ग्रामीण जब आधार केंद्र में अपने दस्तावेजों की जांच कराने पहुंचे तो कई जन्म प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। जांच के दौरान यह भी आशंका जताई गई कि कई प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार किए गए हैं। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने संबंधित कैफे संचालक को बातचीत के बहाने बुलाया और उससे पूछताछ शुरू की। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और इसकी सूचना प्रशासन को दी। सूचना मिलने पर अंचलाधिकारी अरविंद कुमार बेदिया मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। प्रारंभिक जांच के बाद उन्होंने युवक को पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद मुफ्फसिल थाना पुलिस आरोपी को अपने साथ थाना ले गई। मामले को लेकर थाना प्रभारी गौरव कुमार ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जायेगी। इधर, ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन लोगों से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर रुपये लिए गए हैं, उनकी राशि वापस दिलाई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए अपनी मेहनत की कमाई खर्च की थी, इसलिए उन्हें न्याय मिलना चाहिए। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के इस कथित नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा।



