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उद्धव ठाकरे हमारी नहीं, अपनी पार्टी की चिंता करें

महाराष्ट्र के मंत्री ने क्यों कसा ये तंज?

मुबंई। राम मंदिर चंदा विवाद में उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तंज कसा तो भाजपा ने तगड़ा पलटवार किया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने ठाकरे को अपनी पार्टी संभालने और भाजपा की चिंता न करने की सलाह दी है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा, राम मंदिर को लूटने वाली बाबर की पार्टी है। मंत्री चंद्रशेखर ने उद्धव ठाकरे को हिदायत देते हुए कहा, ‘आपके लिए यह मुनासिब रहेगा कि आप लोग भाजपा की चिंता छोड़कर अपने बारे में सोचें। अपनी पार्टी के बारे में सोचें। आज की तारीख में आपकी पार्टी की दुर्गति कैसी है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। किस तरह से आपकी पार्टी के विधायक और सांसद आपको छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थाम रहे हैं, यह बात भी किसी से छुपी नहीं है। ऐसी स्थिति में आपके लिए यह जरूरी हो जाता है कि आप लोग हमें हिदायत देना बंद करके खुद का आत्मचिंतन करें।’
‘उद्धव के पास टीका-टिप्पणी करने के अलावा कोई काम नहीं’
उन्होंने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे को समझना होगा कि भाजपा सत्ता के लिए काम नहीं करती है, बल्कि विचारों और सिद्धांतों के लिए काम करती है और उनके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करती है। उद्धव ठाकरे ने आज की तारीख में अपनी पार्टी की बागडोर कांग्रेस के हाथों में सौंप दी है। इस वजह से उनकी स्थिति ऐसी हो चुकी है कि उनके पास टीका टिप्पणी करने के अलावा कुछ नहीं बचा है। लेकिन, उन्हें यह समझना होगा कि इससे कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। अगर उन्हें लगता है कि इससे कुछ भी प्राप्त होगा, तो मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि इससे इन्हें कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है।
‘मन की भड़ास निकाल रहे उद्धव’
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री ने कहा कि ‘उद्धव ठाकरे भाजपा को लेकर अपने मन में मौजूद भड़ास को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि आज की तारीख में लोग इस बात को महसूस कर चुके हैं कि अगर कोई बाला साहेब ठाकरे के सिद्धांत को आगे ले जाने का काम कर सकता है, तो वह एकनाथ शिंदे की शिवेसना ही है। यही कारण है कि आज हमें अपार जनसमर्थन मिल रहा है।’
उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को मेरा सुझाव रहेगा कि जिन लोगों के साथ वह 25 वर्षों तक रहें, उन पर इस तरह की अशोभनीय टिप्पणी करना उचित नहीं रहेगा। उनके लिए यह बेहतर रहेगा कि वह खुद पर आत्मचिंतन करें और अपने अंदर जो खामी है, उसे दूर करने का काम करें।

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